International News: अमेरिकी कानून के तहत दाखिल दस्तावेजों से पाकिस्तान की बढ़ती लॉबिंग गतिविधियों का खुलासा हुआ है। ये दस्तावेज पाकिस्तानी सरकार और उससे जुड़े संगठनों के करोड़ों रुपये के अनुबंध दिखाते हैं। इसका लक्ष्य अमेरिकी संसद, कार्यपालिका, थिंक टैंक और मीडिया को प्रभावित करना है।
दाखिल आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग से जुड़े थिंक टैंक को नब्बे लाख डॉलर मिले। यह राशि अमेरिका में लॉबिंग और सार्वजनिक नीति संवाद के लिए दी गई। इसके अलावा कई निजी फर्मों के साथ मोटी मासिक फीस वाले अनुबंध भी सामने आए हैं।
अमेरिकी संसद और सरकार पर निशाना
पाकिस्तानी दूतावास ने एक लॉबिंग फर्म के साथ महीने के पच्चीस हजार डॉलर का अनुबंध किया है। इस फर्म का काम अमेरिकी संसद और सरकारी अधिकारियों से मिलना है। साथ ही नीति समूहों और थिंक टैंक के साथ संवाद करना भी शामिल है।
इस गतिविधि का फोकस क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास जैसे मुद्दे हैं। एक अन्य फर्म को पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए महीने के पचास हजार डॉलर मिलते हैं। इसका काम पाकिस्तान के रुख को अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाना है।
कश्मीर और भारत संबंधों पर विशेष ध्यान
दाखिल दस्तावेजों से पता चलता है कि इन फर्मों की एक प्रमुख जिम्मेदारी कश्मीर मुद्दा है। ये फर्म जम्मू-कश्मीर विवाद और पाकिस्तान-भारत संबंधों पर पाकिस्तान का रुख सामने रखती हैं। इसका लक्ष्य अमेरिकी कार्यपालिका और संसद के सदस्य हैं।
साथ ही ये फर्म इन मुद्दों पर हर नए विकास पर नजर रखती हैं। अमेरिकी जनता तक अपना पक्ष पहुंचाना भी इन गतिविधियों का एक हिस्सा है। इन प्रयासों से पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना चाहता है।
दुर्लभ खनिजों के सहयोग का प्रस्ताव
मई में जारी एक प्रस्तावित ढांचा दस्तावेज भी सामने आया है। इसमें पाकिस्तान और अमेरिका के बीच दुर्लभ खनिजों पर सहयोग की रूपरेखा है। यह सहयोग अन्वेषण, खनन और प्रसंस्करण तक फैला हुआ है।
इस प्रस्ताव में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकरण का भी जिक्र है। दस्तावेज में इस सहयोग की संभावित व्यावसायिक कीमत एक खरब डॉलर तक बताई गई है। यह पाकिस्तान के आर्थिक हितों को बढ़ावा देने का प्रयास लगता है।
मीडिया आउटरीच और सार्वजनिक संबंध
पाकिस्तान ने अपनी छवि सुधारने के लिए एक सार्वजनिक संबंध फर्म भी नियुक्त की है। इस फर्म का काम मीडिया आउटरीच और कहानी विकास करना है। यह कदम पाकिस्तान के व्यापक प्रचार अभियान का हिस्सा प्रतीत होता है।
ये सभी गतिविधियां अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम के तहत दर्ज की गई हैं। यह कानून अमेरिका में विदेशी हितों की लॉबिंग पर नजर रखता है। इन दाखिल दस्तावेजों से पाकिस्तान की अमेरिकी नीति को प्रभावित करने की रणनीति स्पष्ट होती है।
