Bangladesh News: पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के पीछे एक बेहद खतरनाक साजिश सामने आई है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI वहां भारत विरोधी जहर घोल रही है। इनका मकसद बांग्लादेश को पूरी तरह से एक कट्टरपंथी इस्लामी राष्ट्र बनाना है। हिंदुओं की हत्याएं महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा प्लान है। इसमें जमात-ए-इस्लामी का भी बड़ा हाथ बताया जा रहा है। ये ताकतें चाहती हैं कि भारत में भी माहौल बिगड़े।
वसूली और हत्या का खूनी खेल
कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या को पैसा कमाने का जरिया बना लिया है। यह एक संगठित ‘जबरन वसूली मॉडल’ बन चुका है। अपराधी पहले अल्पसंख्यकों से पैसों की मांग करते हैं। पैसे न मिलने पर वे बेरहमी से उनकी हत्या कर देते हैं। खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के मुताबिक, इनके पास कोई हिट-लिस्ट नहीं है। वे किसी भी बांग्लादेश निवासी हिंदू को निशाना बना लेते हैं। ये हत्यारे सिस्टम का फायदा उठा रहे हैं और प्रशासन इसे रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।
भारत में दंगे भड़काने की कोशिश
ISI की सबसे बड़ी साजिश हर बांग्लादेशी के दिल में भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत भरना है। वे चाहते हैं कि इन हत्याओं की आग भारत तक पहुंचे। उनका मकसद इन घटनाओं के जरिए भारत में सांप्रदायिक दंगे भड़काना है। पाकिस्तान अपनी पुरानी अल्पसंख्यक विरोधी रणनीति अब ढाका में अपना रहा है। वह चाहता है कि बांग्लादेश हमेशा असुरक्षित बना रहे और उसकी रणनीतिक स्वायत्तता खत्म हो जाए।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि वहां की पुलिस जांच में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। मामलों को जानबूझकर कमजोर किया जाता है। गिरफ्तार आरोपियों को कोई कड़ी सजा नहीं मिल रही है। आरोप है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार का भी इन कट्टरपंथियों को समर्थन हासिल है। अगर अपराधियों को सख्त सजा मिलती तो शायद यह कत्लेआम रुक सकता था, लेकिन सिस्टम की लाचारी ने हत्यारों के हौसले बढ़ा दिए हैं।
चुनाव टालने का षड्यंत्र
बांग्लादेश में आम चुनाव नजदीक हैं। इसे टालने के लिए जानबूझकर देश का माहौल खराब किया जा रहा है। ISI चुनाव से पहले पूरे देश को भारत विरोधी बनाने में जुटी है। हाल ही में छात्र नेता उस्मान हादी की मौत पर निकाला गया मार्च इसका सबूत है। उस मार्च में न्याय मांगने से ज्यादा भारतीयों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठी थी। पाकिस्तान धार्मिक पहचान को हथियार बनाकर पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने में लगा है।
