शिमला: प्रदेश में काेविड मरीजों के बढ़ने के साथ ही आक्सीजन की मांग दो सप्ताह के दौरान 17 गुणा तक बढ़ गई है। दो सप्ताह पूर्व करीब एक मीट्रिक टन आक्सीजन की कोविड मरीजों को आवश्यकता पड़ रही थी। अब प्रदेश के कोविड अस्पतालों में 17 मीट्रिक टन आक्सीजन की जरुरत हो गई है। प्रदेश में एक्टिव मामलों की संख्या 17 हजार तक पहुंच गई है। आक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रदेश में किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए 57 मीट्रिक टन आक्सीजन का भंडारण सिलेंडरों में कर लिया है। प्रदेश में आक्सीजन की भंडारण क्षमता को और बढ़ाया जा रहा है जिससे लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।

वीरवार को प्रदेश में 11 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता थी और शुक्रवार को ये मांग बढ़कर 17 मीट्रिक टन हो गई। प्रदेश के कोविड अस्पतालों में दाखिल मरीजों की संख्या 1187 है और 281 कोविड केयर अस्पतालों में दाखिल हैं। कोविड मरीजों में आक्सीजन का स्तर कम होने पर उन्हें कृत्रिम आक्सीजन प्रदान की जा रही है। जिसके कारण आक्सीजन की खपत प्रदेश में बढ़ गई है।

प्रदेश में कहां-कहां कृत्रिम आक्सीजन की खपत ज्यादा

  • संस्थान व जिला, आक्सीजन की खपत मीट्रिक टन में
  • चंबा अस्पताल, 7
  • टांडा मेडिकल काॅलेज, 5
  • आईजीएमसी शिमला, 4
  • नाहन मेडिकल काॅलेज, 1

प्रदेश में भंडारण को 4127 डी-टाइप व 1229 बी टाईप आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध

प्रदेश में आक्सीजन को भंडारण करने के लिए डी-टाइप के 4127 सिलेंडर उपलब्ध हैं। इन डी-टाइप के एक सिलेंडर में 7 क्यूबिक मीटर आक्सीजन आती है। जबकि 1229 मीट्रिक टन बी-टाइप के आक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। बी-टाइप के उक सिलेंडर में 1.5 क्यूबिक मीटर आक्सीजन आती है।

आक्सीजन की कमी नहीं: सीएम

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है प्रदेश में आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को आक्सीजन के खाली सिलेंडर लेने के लिए कहा गया है, जिससे आक्सीजन का भंडारण किया जा सके और किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटा जा सके।

By rnidesk

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