देशभर के कई हिस्सों में होने वाली सेना भर्तियों में भाग लेने वाले युवाओं को या तो सड़कों पर रातें काटनी पड़ती हैं या फिर भारी-भरकम खर्च उठाकर होटल में रुकना और ढाबों मे पैसे खर्च करके खाना खाने को मजबूर होना पड़ता है। एक तरफ सेना भर्ती की उन्हें चिंता होती है तो दूसरी तरफ भर्ती स्थल पर पहुंचने के बाद अपनी तमाम व्यवस्थाओं को जुटाने की भी चुनौतियां। लेकिन हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से जिला ऊना ने एक ऐसी बड़ी मिसाल पेश की है जो न सिर्फ हिमाचल अब बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गई है। सेना भर्ती के लिए यहां आने वाले युवाओं को स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं, धार्मिक संस्थान और जिला प्रशासन ने मिलकर रहने और खाने की व्यवस्था की है। युवाओं की मदद के लिए उठ रहे इन हाथों को देखकर यहां के दो अधिवक्ताओं ने भी उनके लिए निःशुल्क एफिडेविट अटेस्ट की सेवा प्रदान करने को कदम बढ़ाए हैं। सेना भर्ती में पहुंचने वाले युवक खुद बताते हैं कि वह कई जगह सेना भर्ती के लिए जाते हैं लेकिन उन्हें स्थानीय स्तर पर ऐसी कभी भी सुविधाएं नहीं मिली। यूं तो ऊना छोटा सा जिला है लेकिन ऊना का दिल बहुत बड़ा है। 

सेना भर्ती में भाग लेने वाले युवाओं के लिए मदद की पहल करने वाले ऊना जनहित मोर्चा के चेयरमैन हरिओम गुप्ता और अध्यक्ष राजीव भनोट बताते हैं कि वर्ष 2019-20 के दौरान जब कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी तो ऐसे में जिला मुख्यालय के इंदिरा गांधी खेल परिसर में सेना भर्ती का आयोजन किया गया। उस वक्त यह विचार आया कि इस कड़ाके की सर्दी में सेना भर्ती में भाग लेने वाले युवा कहां रात बिताएंगे और उन्हें कौन यहां पर खाना खिलाएगा। हालांकि इससे पहले की हुई भर्तियों के दौरान कड़ाके की सर्दी में बाहरी जिलों से आने वाले युवा अभ्यर्थी सड़कों पर रातें बिताने को मजबूर होते थे। लेकिन युवाओं के लिए कुछ कर गुजरने की चाह ने एक से दो, दो से तीन और भी न जाने कितने लोगों को एक साथ मिलाते हुए एक अभियान शुरू किया। जिसमें न सिर्फ इन युवाओं के खाने की व्यवस्था जनहित मोर्चा द्वारा की गई, बल्कि कड़ाके की सर्दी में उन्हें सिर ढकने और ठंड से बचने के लिए छत भी प्रदान की गई। जनहित मोर्चा ने इंदिरा मैदान के साथ लगते पीजी काॅलेज के परिसर में युवाओं के खाने के लिए सुबह से लेकर रात तक भंडारा शुरू किया वहीं ऊना शहर और साथ लगते धार्मिक संस्थानों में इनके ठहरने की भी व्यवस्था की। 

यह सिलसिला यहीं तक नहीं रुका जनहित मोर्चा के प्रयासों को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता भी उनकी मदद के लिए आगे आए और युवाओं को सेना भर्ती स्थल पर ही निःशुल्क एफिडेविट अटेस्ट करने की सुविधा प्रदान की जाने लगी। जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं केशव चंदेल और रमेश सारथी ने भी लंगर स्थल पर ही युवाओं के एफिडेविट की निःशुल्क व्यवस्था भी की है। रमेश सारथी कहते हैं कि ऊना आने वाले युवाओं पर यहां का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पढ़ना चाहिए यहां के लोग हमेशा मददगार रहे हैं और इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए हम भी जिला के बाहर से आने वाले युवाओं की थोड़ी बहुत मदद कर रहे हैं।

सेना भर्ती में बाहरी जिलों से भाग लेने के लिए आने वाले युवाओं ने भी यहां के स्वयंसेवी संस्थाओं और उनकी मदद के लिए आगे आने वाले लोगों का तहे दिल से शुक्रगुजार किया है। युवाओं का कहना है कि वह सेना भर्ती के लिए कई जगह पर जाते रहे हैं लेकिन जिस तरह की मदद उन्हें ऊना में उपलब्ध कराई गई है, ऐसा कभी भी और कहीं भी देखने को नहीं मिला। युवाओं का कहना है कि वह सेना भर्ती में भाग लेने के लिए ऊना पहुंचे हैं और यहां पर वह केवल और केवल मात्र अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, क्योंकि यहां पर न तो उन्हें खाने की कोई चिंता है और न ही रहने की। युवाओं का कहना है कि ऊना बेशक छोटा सा जिला है, लेकिन ऊना का दिल बहुत बड़ा है। 

जनहित मोर्चा की इस पहल में कई स्थानीय लोग भी मदद के लिए रोजाना भंडारा स्थल पर पहुँच रहे है और खाना वितरित करने सहित अन्य कामों में जनहित मोर्चा के सदस्यों का हाथ बंटाते है। स्थानीय लोगों ने ऊना जनहित मोर्चा द्वारा सेना भर्ती के लिए आए युवाओं की मदद को किए गए प्रयासों की उन्मुक्त कंठ से सराहना की है। शहरवासियों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश के इस छोटे से जिला के लोगों ने वह बड़ा काम करके दिखा दिया है जो न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश की संस्थाओं के लिए धार्मिक संस्थानों के लिए और प्रशासन के लिए एक मिसाल होगा। ऊनावासियों का कहना है कि हमारे युवा हमारी ही सेनाओं में सेवा देने के जज्बे से दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचते हैं। ऐसे में हमारा क्या कर्तव्य और क्या दायित्व उनके प्रति बनता है यह भी हमें यहां के समाज सेवी संस्थाओं धार्मिक संस्थानों और जिला प्रशासन ने सिखाया है।

error: Content is protected !!