लोकसभा में विपक्षी सांसदों की बड़ी जीत: क्या सत्ता और विपक्ष के बीच खत्म हुआ टकराव? जानें अंदर की खबर!

New Delhi News: लोकसभा ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए बजट सत्र के लिए निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया। सरकार ने यह फैसला सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बनी आपसी सहमति के बाद लिया। कांग्रेस की मांग पर सरकार ने सदन में प्रस्ताव पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इन सांसदों को 3 फरवरी को सदन में आक्रामक विरोध प्रदर्शन करने के कारण पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया था। अब ये सभी सांसद तत्काल प्रभाव से सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे।

संसदीय मर्यादा पर तीखी बहस

निलंबन वापसी के दौरान सदन में ‘संसदीय लक्ष्मण रेखा’ को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच दिलचस्प बहस हुई। सत्ता पक्ष ने सलाह दी कि विपक्ष को सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए। इस पर विपक्षी सांसदों ने पलटवार करते हुए कहा कि अनुशासन एकतरफा नहीं हो सकता। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के व्यवहार पर सवाल उठाए। वहीं, सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष खुद नियमों का पालन करने के लिए तैयार नहीं है।

स्पीकर ओम बिरला की सख्त हिदायत

बहस के बीच हस्तक्षेप करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी सदस्यों को सख्त नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सदन में पोस्टर-बैनर लहराना और कागज फाड़कर उछालना संसदीय गरिमा के खिलाफ है। स्पीकर ने सदस्यों से संयम बरतने और सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने को कहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जनता ने हमें सदन चलाने के लिए चुना है, बाधा डालने के लिए नहीं।

इन सांसदों की हुई सदन में वापसी

निलंबन खत्म होने के साथ ही कांग्रेस और माकपा के आठ सांसदों को बड़ी राहत मिली है। इनमें कांग्रेस के मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडेन, सी किरण कुमार रेड्डी, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग और प्रशांत पाडोले शामिल हैं। इनके अलावा माकपा के एस वेंकटेशन का निलंबन भी तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गया है। ये सभी सांसद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका न देने के विरोध में निलंबित हुए थे।

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