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विरोध का हमला: हाईकोर्ट के पंचायत चुनाव फैसले पर भी उठ रहे सवाल, पूर्व मंत्री ने कहा- ‘सुक्खू सरकार का घायल अहंकार’

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही है। यह सरकार के घायल अहंकार का प्रमाण है।

बिक्रम ठाकुर ने शुक्रवार को एक प्रेस बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। यह सरकार लोकतंत्र और संविधान का सम्मान नहीं करती। वह अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति को सर्वोपरि मानती है।

हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल क्यों?

पूर्व मंत्री ने सरकार के रवैये पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार की आदत बन गई है। जब फैसला पक्ष में आता है तो न्यायपालिका महान। जब फैसला खिलाफ आता है तो अदालत पर उंगली उठाना। यह न्यायालय की स्पष्ट अवमानना है।

ठाकुर का आरोप है कि यह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास है। सरकार का यह रवैया बताता है कि वह कानून के राज में नहीं विश्वास रखती। उन्होंने कहा कि सरकार कांग्रेस के राज में विश्वास रखती है।

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हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा। अदालत ने गंभीरता से तर्कों को सुना। इसके बाद पंचायत चुनाव करवाने का स्पष्ट आदेश दिया। पर सरकार इस आदेश को मानने को तैयार नहीं है।

सरकार क्यों चाहती है सुप्रीम कोर्ट जाना?

बिक्रम ठाकुर ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाने का संकेत जनहित के लिए नहीं है। यह सिर्फ इसलिए है कि मुख्यमंत्री और उनकी टीम साबित करना चाहती है कि उनका फैसला ही सही है।

यह लड़ाई लोकतंत्र की नहीं है। यह सरकार के घायल अहंकार की लड़ाई है। सरकार बार-बार पंचायत चुनावों से भागती रही है। उसे जमीनी सच्चाई और अपनी नाकामियों का डर सता रहा है।

सरकार के पास महंगाई का कोई जवाब नहीं है। बेरोजगारी की समस्या दिन पर दिन बढ़ रही है। विकास कार्यों की गति ठप पड़ी हुई है। ग्रामीण हिमाचल की उपेक्षा जारी है।

सरकार क्या दे रही है बहाने?

पूर्व मंत्री ने सरकार के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार हर बार नया बहाना ढूंढती है। कभी आपदा का बहाना बनाया जाता है। कभी प्रशासनिक अड़चनों का हवाला दिया जाता है। अब अदालतों पर दोषारोपण शुरू हो गया है।

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सुक्खू सरकार को अपना अहंकार छोड़ देना चाहिए। उन्हें न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए। अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो जनता समझ जाएगी। यह लड़ाई विकास या जनहित की नहीं है।

यह लड़ाई सत्ता के नशे में चूर सरकार की इच्छापूर्ति की लड़ाई है। प्रदेश की जनता भलीभांति इस सच्चाई को समझती है। उन्हें पता है कि सरकार अपनी राजनीतिक हार को छुपाना चाहती है।

बिक्रम ठाकुर ने सरकार को सख्त चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है। सरकार के हर कदम पर नजर है। पंचायत चुनाव लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी हैं। इन्हें टालना लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ है।

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की उम्मीद है।

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