कमीशन और बैचवाइस ही हो सकती है अध्यापकों की नियुक्तियां, फिर बैकडोर से एंट्री क्यों- मनकोटिया

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हिमाचल प्रदेश प्रशिक्षित बेरोजगार अध्यापक संघ ने आनलाईन बैठक की। बैठक में संघ के प्रदेशाध्यक्ष निर्मल सिंह धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय सिंह, उपाध्यक्ष संजय राणा, अजय रत्न, महासचिव श्रीमति लाजेश धीमान, अतिरिक्त महासचिव लेख राम, वित सचिव संजीव कुमार तथा प्रैस सचिव प्रकाश चंद ने भाग लिया। उन्होंने सांझा बयान में कहा कि माननीय शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने विधानसभा में दिए गए अपने ही ब्यान को पलट कर लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया है। ज्ञात रहे माननीय शिक्षा मंत्री ने बजट सत्र के दौरान विधानसभा में यह ब्यान दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने एस. एम. सी शिक्षकों को नियमित करने के लिए नहीं कहा है तथा सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करेगी।

अब शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि एस. एम. सी शिक्षकों के लिए सरकार जल्द नई नीति वनाऐगी। उन्होने कहा कि एस. एम. सी शिक्षकों के लिए 17 – 7-2012 को धूमल सरकार नीति बना चुकी है जिसकी चर्चा सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24-11-2020 के फैसले में हो चुकी है। इन शिक्षकों के लिए दूसरी नीति बनाना असंवैधानिक है। जितने भी भर्ती नियम बनते हैं। वह संविधान की धारा 309 के अनुसार बनते हैं। भर्ती नियमों के अनुसार नियमित शिक्षको की भर्ती या तो कमिशन से हो सकती या वैचवाईज हो सकती है। तीसरा कोई विकल्प नहीं है।

जयराम सरकार बिना कमिशन और बिना वैचवाईज भर्ती करके सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को तार तार कर रही है। इससे किसानों, मजदूरों और बेरोजगारों के बच्चों का जीवन वर्वाद हो जाऐगा। बिना कमिशन और बिना वैचवाईज भर्ती होने के कारण 1998 और 1999 वैच के पात्र उमीदवार अभी भी बेरोजगार हैं। दूसरी तरफ 2000 वैच के तथा उसके बाद के उमीदवार चोर दरबाजे से नौकरी ले गए हैं। सरकार जनता को गुमराह कर रही है कि 2555 एस. एम. सी शिक्षक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाऐं दे रहे हैं। सच तो यह है कि 2555 एस. एम. सी शिक्षक प्रदेश के सभी जिलों में तैनात हैं।

एक आर. टी. आई के अनुसार पता चला है कि 792 एस. एम. सी लैक्चरर में से 582 लैक्चरर गैर कबाईली क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। पैट और जी. बी. यू शिक्षक इसलिए सुप्रीम कोर्ट में जीत गए थे क्योंकि उनके केस में भर्ती के समय प्रशिक्षित शिक्षक नहीं थे। इसके उपरांत मुख्य याजिकाकर्ता सी. एम नेगी भर्ती के समय प्रशिक्षित नहीं था। एस. एम. सी केस में ऐसा नहीं है। इसलिए एस. एम. सी का फैसला बेरोजगारों के पक्ष में आया है। पिछले बीस साल में 15000 शिक्षक भर्ती किए जा चुके हैं जिसमें एक भी भर्ती नियमानुसार वैचवाईज नहीं की गई है।

यही कारण है कि बेरोजगार 23 साल से इन 15000 शिक्षकों की भर्तीयों में वैचवाईज भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। इन हजारों हजारों बेरोजगारों की सरकार ने संविधान की अवमानना करके जिदंगीया तबाह कर दी हैं। वीरभद्र सरकार, धुमल सरकार और जयराम सरकार को संविधान की शपथ नहीं लेनी चाहिए थी क्योंकि इन्होंने अपने चहेतों को लाभ देने के लिए संविधान की धज्जियाँ उड़ा रखीं हैं। यहां तक कि जयराम सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रही है।

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