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ऑफिस में हादसा: बीमार मां के लिए छुट्टी मांगने पर मैनेजर का बेरहम जवाब, ‘शेल्टर होम में छोड़कर आ जाओ’

National News: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने कार्यस्थल की संवेदनहीनता पर बहस छेड़ दी है। रेडिट पर एक उपयोगकर्ता ने दावा किया है कि एक प्राइवेट बैंक की महिला कर्मचारी ने अपनी गंभीर रूप से बीमार मां की देखभाल के लिए छुट्टी मांगी। उसके मैनेजर ने न सिर्फ छुट्टी मंजूर करने से इनकार कर दिया, बल्कि एक आघातकारक सुझाव भी दिया। मैनेजर ने कहा कि वह अपनी मां को किसी मेडिकल सेंटर या शेल्टर होम में छोड़कर काम पर आ जाए।

पोस्ट के अनुसार, महिला कर्मचारी ने बताया था कि गलत दवा के कारण उसकी मां की हालत नाजुक है। उसने कुछ दिनों की छुट्टी के लिए आवेदन किया था। मैनेजर का जवाब अमानवीय था। इस घटना के बाद महिला ने अपनी मां के साथ रहने का फैसला किया और नौकरी छोड़ने को मजबूर हुई। वह कई वर्षों से बैंक में काम कर रही थी।

रेडिट यूजर ने साझा किया पूरा वाकया

उपयोगकर्ताने लिखा कि यह घटना एक बड़े निजी बैंक में घटी। उसकी सहकर्मी ने कोई विशेष रियायत नहीं मांगी थी। उसे सिर्फ अपनी मां की देखभाल के लिए थोड़ा समय चाहिए था। मैनेजर ने दो विकल्प दिए। पहला विकल्प सामान्य रूप से काम पर आना था। दूसरा विकल्प मां के साथ रहना था।

कर्मचारी ने अपनी मां को चुना। इस निर्णय का तत्काल परिणाम यह हुआ कि उसे इस्तीफा देना पड़ा। पोस्ट शेयर करने वाले यूजर ने लिखा कि उन्हें नहीं पता ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। उन्होंने दूसरे उपयोगकर्ताओं से राय मांगी। उन्होंने पूछा कि अगर वे उस स्थिति में होते तो क्या करते।

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सोशल मीडिया पर उठी आक्रोश की लहर

इस पोस्ट पर सैकड़ोंलोगों ने प्रतिक्रिया दी है। अधिकांश लोगों ने मैनेजर के रवैये की कड़ी निंदा की है। कई लोगों ने इसे कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न बताया है। उनका कहना है कि ऐसे मैनेजर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ लोगों ने बैंक प्रबंधन से हस्तक्षेप की मांग की है।

यूजर्स ने कहा कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। कंपनियों को मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस घटना ने कॉर्पोरेट संस्कृति में संवेदनहीनता के गंभीर मुद्दे को उजागर किया है। लोग कानूनी उपायों की जानकारी साझा कर रहे हैं।

कर्मचारी अधिकार और कानूनी प्रावधान

भारत मेंकर्मचारी अधिकारों से संबंधित कई कानून हैं। कारखाना अधिनियम और दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम जैसे कानून छुट्टियों का प्रावधान करते हैं। अधिकांश कंपनियों के मानव संसाधन नीतियों में आपातकालीन छुट्टी का प्रावधान होता है। माता-पिता की गंभीर बीमारी पर छुट्टी देने का चलन है।

कई प्रगतिशील कंपनियां केयर लीव जैसी सुविधाएं भी देती हैं। इस मामले में मैनेजर का रवैया न केवल नैतिकता बल्कि संभावित रूप से कंपनी नीति के भी विपरीत है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कर्मचारी उच्च प्रबंधन या एचआर से शिकायत कर सकता है।

कार्यस्थल संस्कृति पर सवाल

यह घटनाकार्यस्थल पर मानवीय मूल्यों के ह्रास का संकेत देती है। लाभ और उत्पादकता के दबाव में संवेदनाएं गौण हो रही हैं। यह मामला मात्र एक छुट्टी का नहीं है। यह नैतिकता और प्रबंधन दर्शन का मामला है। कर्मचारी की भावनात्मक भलाई उत्पादकता से जुड़ी हुई है।

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तनावग्रस्त कर्मचारी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता। सहानुभूति दिखाने से कर्मचारी की निष्ठा बढ़ती है। इसके विपरीत व्यवहार से मनोबल गिरता है और टीम की भावना प्रभावित होती है। यह घटना प्रबंधकीय प्रशिक्षण की कमी को भी दर्शाती है।

वर्क फ्रॉम होम एक विकल्प हो सकता था

महामारीके बाद वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा है। इस मामले में मैनेजर दूरस्थ कार्य का विकल्प दे सकता था। इससे कर्मचारी अपनी मां की देखभाल भी कर पाती और काम भी जारी रख पाती। लचीले कार्य व्यवस्था आधुनिक कार्यस्थल की जरूरत है।

कई कंपनियां हाइब्रिड मॉडल अपना रही हैं। इससे कर्मचारी संतुलन बनाए रखते हैं। दुर्भाग्य से इस मामले में मैनेजर ने लचीलेपन की बजाय कठोर रुख अपनाया। इसने एक अनुभवी कर्मचारी को खोने की स्थिति पैदा कर दी।

नेटिजन्स की प्रमुख प्रतिक्रियाएं

रेडिट पर इस पोस्ट केकमेंट सेक्शन में विविध प्रतिक्रियाएं मिलीं। एक यूजर ने सलाह दी कि कर्मचारी को कंपनी के एचआर विभाग से संपर्क करना चाहिए था। दूसरे यूजर ने लेबर कानूनों की जानकारी दी। किसी ने सुझाव दिया कि स्थानीय श्रम अधिकारियों से शिकायत की जा सकती है।

कुछ यूजर्स ने खुद ऐसे अनुभव साझा किए। उन्होंने कार्यस्थल पर समान व्यवहार की बात कही। कई लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव की चर्चा की। तनावपूर्ण कार्य वातावरण उत्पादकता के लिए हानिकारक है। यह चर्चा अब तक जारी है।

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