हिमाचल प्रदेश में दादा-दादी, माता-पिता या पुत्र और अविवाहित बेटी ने अगर सरकारी जमीन पर कब्जा किया है तो उस परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग पंचायत चुनाव लड़ने का सपना भूल जाएं। नामांकन के साथ प्रत्याशी को ऐसे मामलों में संलिप्त न होने का शपथ पत्र देना होगा। अगर कोई इन मामलों में संलिप्त पाया जाता है तो उनका नामांकन रद्द हो जाएगा। एसडीएम धर्मपुर सुनील वर्मा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अगर उम्मीदवार के अलावा उसके दादा-दादी, माता-पिता, पुत्र एवं अविवाहित बेटी ने भी सरकारी भूमि पर कब्जा किया हो, तब भी उस उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो जाएगा।  

उम्मीदवार को नामांकन के दौरान शपथ पत्र में यह दर्शाना होगा कि उसके और उसके परिवार के सदस्यों ने सरकारी भूमि पर कब्जा नहीं किया है। इसके अलावा अगर किसी को पंचायत में चुनाव संबंधी धांधली में सजा हुई हो, सरकारी सेवा से निष्कासित किया हो, सरकारी नौकरी में हो, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकते। पंचायत की ओर से करवाए गए कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर किसी प्रकार की भागीदार या स्वार्थ निहित हो, वह भी चुनाव नहीं लड़ सकता है। पंचायत, सभा, समिति, जिला परिषद फंड की ओर से दर्शाए गए शुल्क की अदायगी न की गई तो वह व्यक्ति भी चुनाव नहीं लड़ सकता।

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