New Delhi: जब भी ताकतवर मुद्रा की बात होती है, तो सबकी जुबान पर अमेरिकी डॉलर का नाम आता है। इसे दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैल्यू के मामले में अमेरिकी डॉलर नंबर वन नहीं है? दुनिया में कई ऐसी करेंसी हैं, जिनकी कीमत डॉलर से कहीं ज्यादा है। इनकी वैल्यू के आगे डॉलर भी बौना नजर आता है। आज हम आपको उन मुद्राओं के बारे में बताएंगे जो कीमत में डॉलर से भी आगे हैं।
कुवैती दिनार है सबसे महंगी
दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी कुवैती दिनार (Kuwaiti Dinar) है। कुवैत के पास तेल का विशाल भंडार है। इस वजह से वहां की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है। भारत में एक कुवैती दिनार की कीमत 290 रुपये से भी ज्यादा है। सरकार ने करेंसी की सप्लाई को सीमित रखा है। यही कारण है कि इसकी वैल्यू हमेशा अमेरिकी डॉलर से काफी ऊपर रहती है।
बहरीन और ओमान की मुद्रा का जलवा
कुवैती दिनार के बाद बहरीन दिनार और ओमानी रियाल का नंबर आता है। बहरीन दिनार की कीमत भारतीय रुपये में 230 रुपये से अधिक है। यह करेंसी अमेरिकी डॉलर से जुड़ी (Pegged) है, जिससे इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता। वहीं, एक ओमानी रियाल खरीदने के लिए आपको करीब 240 रुपये खर्च करने होंगे। ओमान ने जानबूझकर अपनी करेंसी की वैल्यू काफी ऊंची रखी है। तेल निर्यात से ओमान को बहुत मदद मिलती है।
पाउंड और जॉर्डनियन दिनार भी आगे
जॉर्डनियन दिनार भी अमेरिकी डॉलर को कड़ी टक्कर देता है। इसकी कीमत 125 रुपये के आसपास है। जॉर्डन की इकोनॉमी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन करेंसी को स्थिर रखने के लिए इसे डॉलर से लिंक किया गया है। इसके अलावा, ब्रिटिश पाउंड दुनिया की सबसे पुरानी और भरोसेमंद मुद्राओं में शामिल है। लंदन एक बड़ा ग्लोबल फाइनेंशियल हब है। इस वजह से पाउंड हमेशा मजबूत रहता है। भारत में एक पाउंड की कीमत लगभग 120 रुपये रहती है।
यूरो और स्विस फ्रैंक की स्थिति
यूरोप की मुख्य करेंसी यूरो और स्विट्जरलैंड का स्विस फ्रैंक भी इस लिस्ट में शामिल हैं। स्विस फ्रैंक को दुनिया की सबसे सुरक्षित करेंसी माना जाता है। इसकी कीमत 110 रुपये से ज्यादा है। स्विट्जरलैंड की बैंकिंग व्यवस्था बहुत मजबूत है। वहीं, यूरो दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है। इसकी एक यूनिट की वैल्यू भी अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है। केमैन आइलैंड्स डॉलर भी टैक्स हेवन होने के कारण काफी मजबूत स्थिति में है।
डॉलर पीछे क्यों है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि जिसकी करेंसी महंगी, वह देश सबसे ताकतवर। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल इंटरनेशनल ट्रेड में सबसे ज्यादा होता है। यह दुनिया की रिजर्व करेंसी है। करेंसी की वैल्यू बाजार में नोटों की सप्लाई और डिमांड पर निर्भर करती है। कुवैत जैसे देशों ने अपनी करेंसी की सप्लाई बहुत कम रखी है। वहीं, अमेरिका पूरी दुनिया के व्यापार के लिए डॉलर छापता है। इसलिए डॉलर की एक यूनिट की कीमत इन देशों से कम है।
