आउटसोर्स को 4 माह से नही मिला वेतन; सरकार को शुभकामनाएं

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हिमाचल में शोषण की व्यवस्था लगातार अपने कदम मजबूत कर रही है। फिर शोषण करने वाला आम आदमी हो या सरकार। किसी को कोई फर्क नही पड़ता कि जिसका शोषण किया जा रहा है उस पर क्या बीत रही है। उसका घर कैसे चलेगा। भारत की पुरानी परंपरा है कि दीवाली के दिन खुशियां बांटी जाती है ताकि सभी लोग खुशियां मना सके। लेकिन इस बार हिमाचल प्रदेश सरकार के अंतर्गत काम करने वाले हजारों आउटसोर्स कर्मचारी दीवाली की खुशियों से महरूम रहेंगे। क्योंकि हिमाचल प्रदेश सरकार भी शोषण के मामले में पीछे नही है। हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नही दिया गया है।

हिमाचल प्रदेश सरकार के 30 विभागों में लगभग 30000 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत है। अकेले आइपीएच विभाग में 2322 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत है। जो पम्प ऑपरेटर, मल्टी वर्कर्स आदि है और इनकी तनख्वाह 3500 रुपये महीना है और पिछले चार चार महीनों से तनख्वाह नही मिली है। यह हलर किसी एक जिला के नही बल्कि पूरे हिमाचल के है। जानकारी के मुताबिक सभी कर्मचारी पिछले 15 दिनों से तनख्वाह के लिए मिन्नते कर रहे है लेकिन कहीं से कोई तनख्वाह मिलने के कोई आसार नजर नही आ रहे।

हिमाचल में यह हाल केवल आइपीएच विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का नही है बल्कि सभी विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों का है। हिमाचल पथ परिवहन निगम के आउटसोर्स कर्मचारियों के हालात भी ठीक नही है। पहले पीस मिल आउटसोर्स कर्मचारियों को 8 से 10 हजार सैलरी मिलती थी लेकिन अब कोरोना महामारी के समय उनकी सैलरी भी 5 हजार कर दी गई है। क्योंकि बसें नही चल रही तो उनको काम नही मिल पा रहा। काम नही तो वेतन भी नही के बराबर दिया जा रहा है।

हिमाचल के मंत्री लाखों की गाड़ियां सरकारी खजाने से ले रहे है। विधायक या मंत्री और मुख्यमंत्री का वेतन एक महीना छोड़ो एक दिन देर से नही मिलता। वही दूसे ओर आउटसोर्स कर्मचारियों को कभी भी समय पर वेतन नही मिलता। जबकि हर जगह इनका शोषण सबसे ज्यादा होता है। क्या हिमाचल प्रदेश सरकार में आउटसोर्स कर्मचारी दीवाली नही बनाएंगे या सरकार के नेताओं को ही दीवाली बनाने के अधिकर है?

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