Jammu and Kashmir News: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के MBBS पाठ्यक्रम की मान्यता रद्द कर दी है। यह निर्णय दो जनवरी 2026 को हुए आकस्मिक निरीक्षण के बाद लिया गया। निरीक्षण में शैक्षणिक व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं में गंभीर कमियां पाई गईं। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने संस्थान को न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया।
संस्थान की मान्यता रद्द होने का मुख्य कारण शैक्षणिक संसाधनों की भारी कमी बताया गया। निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 प्रतिशत की कमी थी। साथ ही ट्यूटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या भी 65 प्रतिशत कम पाई गई। ये कमियां छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती हैं।
क्लिनिकल प्रशिक्षण के लिए जरूरी मानकों का भी पालन नहीं हो रहा था। रोजाना ओपीडी में मरीजों की संख्या निर्धारित सीमा से बहुत कम थी। बेड ऑक्यूपेंसी दर भी आवश्यक 80 प्रतिशत के मुकाबले केवल 45 प्रतिशत थी। आईसीयू में भी आधे से कम बेड ही भरे हुए थे।
इससे पहले संस्थान में छात्रों के धार्मिक आधार पर दाखिले को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। भाजपा और कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि मंदिर ट्रस्ट के धन से चलने वाले कॉलेज में एक समुदाय के छात्रों को प्राथमिकता दी गई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया दाखिला प्रक्रिया
मुख्यमंत्रीओमर अब्दुल्ला ने इस मामले में स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि सभी दाखिले NEET की मेरिट सूची के आधार पर हुए थे। प्रवेश प्रक्रिया में धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने राजनीतिक दलों पर सांप्रदायिक रंग चढ़ाने का आरोप भी लगाया।
अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान ने कभी भी अल्पसंख्यक दर्जे के लिए आवेदन नहीं किया। यदि ऐसा करना होता तो संस्था को समय पर ही आवेदन करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की राजनीति उचित नहीं है।
छात्रों के भविष्य का रखा जाएगा ध्यान
मान्यतारद्द होने के बाद छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताई गई। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। प्रभावित छात्रों को राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए उपलब्ध सीटों का इस्तेमाल किया जाएगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने भी इस बात पर जोर दिया है कि निर्णय का आधार केवल संस्थान की कमियां हैं। यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है। कमियों के आधार पर ही मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट दी थी।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम
यह घटनादेश भर के मेडिकल संस्थानों के लिए एक सबक है। यह स्पष्ट करती है कि गुणवत्ता के मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
आयोग की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। छात्रों का भविष्य किसी भी प्रकार के दबाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए। मेडिकल शिक्षा में समानता और उच्च स्तर बनाए रखना सबसे जरूरी लक्ष्य है।
