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निपाह वायरस: पश्चिम बंगाल में लौटा जानलेवा खतरा, दो स्वास्थ्यकर्मी वेंटिलेटर पर

West Bengal News: कोरोना महामारी की यादें अभी ताजा हैं कि पश्चिम बंगाल से एक और खतरनाक वायरस की खबर ने देश को चौंका दिया है। उत्तर 24 परगना के एक निजी अस्पताल में दो नर्स निपाह वायरस के संदेह में गंभीर रूप से बीमार हैं। दोनों को वेंटिलेटर पर रखा गया है। करीब 25 साल बाद राज्य में निपाह की वापसी ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

इन मरीजों के सैंपल पुष्टि के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए हैं। दोनों स्वास्थ्य कर्मचारी हाल ही में अपने गृह जिलों पूर्वी मिदनापुर और पूर्व बर्धमान से लौटे थे। उनमें बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण देखे गए।

इस खबर के मिलते ही केंद्र और राज्य सरकार सतर्क हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की है। केंद्र ने राज्य को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। एक राष्ट्रीय ज्वाइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम भी मौके पर पहुंच गई है।

संपर्क में आए लोगों की तलाश जारी

राज्य प्रशासन नेकॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का काम तेज कर दिया है। संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है। पूर्वी बर्धमान, पूर्वी मिदनापुर और उत्तर 24 परगना जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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निपाह वायरस कोई नया नहीं है। भारत में इसका पहला प्रकोप साल 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में देखा गया था। उस समय संक्रमित 66 लोगों में से 45 की मौत हो गई थी। इसकी मृत्यु दर 40 से 70 प्रतिशत तक बताई जाती है।

निपाह वायरस कैसे फैलता है

यह वायरस मुख्य रूप सेफल खाने वाले चमगादड़ों में पाया जाता है। यह चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फलों या खजूर के रस के सेवन से इंसानों में फैल सकता है। संक्रमित सूअर या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से भी खतरा रहता है।

चिंता की बात यह है कि निपाह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ जैसे लार या पसीने के संपर्क में आने से संक्रमण हो सकता है। इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

निपाह वायरस केशुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। इसमें अचानक तेज बुखार और सिरदर्द होता है। गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। रोग बढ़ने पर चक्कर आना और मानसिक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

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गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन या एन्सेफलाइटिस हो सकता है। मरीज को सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगती है। अंत में कोमा में जाने या मौत का खतरा बहुत बढ़ जाता है। लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।

बरतें यह सावधानियां

जमीन पर गिरेहुए फलों को बिल्कुल न खाएं। खासतौर पर ऐसे फल जिन पर किसी जानवर के कुतरने के निशान हों। कच्चे खजूर के रस का सेवन करने से भी बचना चाहिए। चमगादड़ अक्सर रात में इन्हें दूषित कर देते हैं।

साबुन और पानी से बार बार हाथ धोएं। बाहर से आने के बाद हाथ जरूर साफ करें। संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क से बचें। अगर संपर्क में आना जरूरी है तो पूरा बचाव करें। स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी है।

फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार की पूरी कोशिश है कि वायरस को फैलने से रोका जाए। संदिग्ध मामलों की पुष्टि का इंतजार है। केंद्र सरकार की टीम भी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। जनता से सतर्कता और सहयोग की अपील की गई है।

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