Health News: भारतीय पुरुषों में जल्दी स्खलन एक आम चिंता का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति को प्राकृतिक तरीकों से प्रबंधित किया जा सकता है। तनाव प्रबंधन और जीवनशैली में सुधार इसका प्रमुख समाधान है। चिकित्सक सलाह देते हैं कि बाजार की दवाओं पर निर्भर होने के बजाय वैज्ञानिक उपाय अपनाने चाहिए।
जल्दी स्खलन के पीछे अक्सर मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं। प्रदर्शन का डर और चिंता मुख्य भूमिका निभाते हैं। शारीरिक कारणों में हार्मोनल असंतुलन या कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। विशेषज्ञ जोर देते हैं कि यह एक प्रबंधनीय स्थिति है न कि कोई स्थायी समस्या।
सांस पर नियंत्रण है पहला कदम
यौन क्रियाके दौरान गहरी और नियंत्रित सांस लेना फायदेमंद साबित होता है। यह तकनीक दिमाग को शांत रखने में मदद करती है। इससे स्खलन में देरी हो सकती है। प्राचीन योग पद्धतियों में भी इसका उल्लेख मिलता है। नियमित अभ्यास से इस पर महारत हासिल की जा सकती है।
श्वास लेने और छोड़ने की गति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह ध्यान भटकाने और उत्तेजना को नियंत्रित करने का एक प्रभावी तरीका है। इस अभ्यास को दैनिक जीवन में भी शामिल किया जा सकता है। इससे समग्र तनाव स्तर में कमी आती है।
नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार जरूरी
कीगल व्यायाम श्रोणितल की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह स्खलन पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करता है। इन व्यायामों को दिन में कुछ मिनटों के लिए किया जा सकता है। नियमित योग और एरोबिक व्यायाम भी समग्र सहनशक्ति बढ़ाते हैं।
आहार में जिंक और विटामिन ई युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। बादाम, कद्दू के बीज और हरी पत्तेदार सब्जियां फायदेमंद हैं। संतुलित पोषण शरीर की ऊर्जा को बनाए रखता है। पर्याप्त जलयोजन भी महत्वपूर्ण है।
मानसिक स्वास्थ्य और खुला संवाद
तनाव और चिंतायौन प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। ध्यान और पर्याप्त नींद मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। नींद की कमी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित कर सकती है। आराम करने के तरीके ढूंढना जरूरी है।
साथी के साथ खुला और ईमानदार संवाद रखना चाहिए। यह दबाव और अनिश्चितता को कम करता है। भावनात्मक सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाना फायदेमंद होता है। संबंधों में घनिष्ठता बढ़ाने से प्रदर्शन चिंता घटती है।
विशेषज्ञ से परामर्श लें
यदिसमस्या लगातार बनी रहती है तो यूरोलॉजिस्ट या सेक्सोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। वे सटीक कारणों का पता लगा सकते हैं। कभी-कभी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या भी जिम्मेदार हो सकती है। पेशेवर मार्गदर्शन प्रभावी उपचार योजना प्रदान करता है।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवाओं का उपयोग हानिकारक हो सकता है। कई उत्पाद दावे तो बड़ा करते हैं परंतु प्रमाण सीमित होते हैं। विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हमेशा विशेषज्ञ की राय पर आधारित होने चाहिए।
जीवनशैली में सुधार है महत्वपूर्ण
धूम्रपान और अत्यधिक शराब कासेवन यौन क्रिया को प्रभावित करते हैं। इन आदतों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहना समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। नियमित दिनचर्या बनाने से फर्क पड़ता है।
सकारात्मक मानसिकता विकसित करने पर काम करना चाहिए। आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों में भाग लेना फायदेमंद है। धैर्य रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि सुधार में समय लग सकता है। छोटे-छोटे बदलाव दीर्घकालिक प्रभाव दिखा सकते हैं।

