Meerut News: साइबर ठगों ने अब ठगी का ऐसा डिजिटल जाल बिछाया है, जिसमें एक क्लिक करते ही मोबाइल फोन उनके कब्जे में पहुंच जाता है। व्हाट्सएप पर भेजी जा रही एपीके फाइल के जरिए ठग मोबाइल में सेंध लगाकर बैंक खाते साफ कर रहे हैं। मेरठ में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों ने बिजली बिल, केवाईसी अपडेट और कूरियर ट्रैकिंग के नाम पर भेजी गई लिंक पर क्लिक कर अपने लाखों रुपये गंवा दिए।
ऐसे हो रही ठगी
साइबर विशेषज्ञोंके मुताबिक, ठग लोगों को फोन या व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बैंक केवाईसी अपडेट, आधार वेरिफिकेशन, बिजली बिल या कूरियर डिलीवरी के नाम पर एक लिंक भेजते हैं। इस लिंक में एपीके (एंड्रॉयड एप्लीकेशन किट) फाइल होती है। जैसे ही कोई इसे डाउनलोड करता है, मोबाइल में एक खतरनाक ऐप इंस्टॉल हो जाता है और फोन का पूरा कंट्रोल ठगों के पास पहुंच जाता है।
मेरठ के तीन मामले
<liसाड़ीगेट क्षेत्र के एक व्यापारी के मोबाइल पर बिजली बिल अपडेट करने का मैसेज आया। मैसेज में दिए लिंक से एपीके फाइल डाउनलोड करते ही उनके खाते से 1.20 लाख रुपये निकल गए।
शास्त्री नगर की एक महिला को फोन आया कि उनका कूरियर अटका है। व्हाट्सएप पर भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड करने के कुछ मिनट बाद उनके खाते से 78 हजार रुपये निकल गए।
कंकरखेड़ा निवासी एक युवक को केवाईसी अपडेट के नाम पर एपीके फाइल भेजी गई। फाइल डाउनलोड करते ही उसके मोबाइल का कंट्रोल ठगों के पास पहुंच गया और खाते से 50 हजार रुपये ट्रांसफर हो गए।
व्हाट्सएप हैक कर बना रहे ठगी की चेन
एक्सपर्ट्स बतातेहैं कि साइबर फ्रॉड का एक और खतरनाक पहलू सामने आया है। ठग पहले किसी व्यक्ति का व्हाट्सएप अकाउंट हैक करते हैं और फिर उसी अकाउंट से उसके सभी ग्रुप्स और कॉन्टैक्ट्स में वही एपीके फाइल भेज देते हैं। इस तरह एक डिजिटल चेन बन जाती है और कुछ ही घंटों में सैकड़ों मोबाइल फोन इस जाल में फंस सकते हैं।
साइबर सेल के अनुसार, हर महीने साइबर ठगी की शिकायतों में 20 प्रतिशत मामले एपीके फाइल के जरिए हो रहे हैं।
ऐसे करें बचाव
व्हाट्सएप,एसएमएस या किसी अनजान ग्रुप में बैंक, आधार अपडेट या कूरियर ट्रैकिंग के नाम पर एपीके फाइल भेजी जाए, तो उसे भूलकर भी डाउनलोड न करें।
मोबाइल मेंऑटोमेटिक डाउनलोड का विकल्प बंद रखें।
व्हाट्सएप मेंटू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर चालू करें।
फोन मेंसिर्फ गूगल प्ले स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।
ठगीकी आशंका होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।


