Business News: नेपाल सरकार ने नए साल पर आम जनता को बड़ी राहत दी है। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती का फैसला किया है। पेट्रोल चार रुपये और डीजल पांच रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ है। केरोसिन की कीमतों में भी कमी की गई है।
यह कटौती एक जनवरी 2026 से लागू हो गई है। नए दरों के अनुसार पेट्रोल 159 रुपये प्रति लीटर हो गया है। डीजल 137 रुपये प्रति लीटर पर बिकने लगा है। इस फैसले से परिवहन और दैनिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
नए मूल्य और प्रभाव
ईंधन कीकीमतों में कटौती के बाद पेट्रोल 159 रुपये लीटर हो गया। डीजल 137 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। यह कटौती सभी श्रेणियों के लिए लागू हुई है। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने आधिकारिक रूप से नए दरों की पुष्टि की।
सरकार के इस फैसले से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा। परिवहन लागत कम होने से वस्तुओं की कीमतों में कमी आ सकती है। किसानों और उद्योगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। पूरी अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
तीन श्रेणियों में विभाजन
नेपाल मेंईंधन की बिक्री तीन श्रेणियों में होती है। पहली श्रेणी में मैदानी इलाके आते हैं। इसमें बिराटनगर, जनकपुर और नेपालगंज शामिल हैं। अमलेखगंज, भलबारी और धनगढ़ी भी इसी श्रेणी में हैं।
दूसरी श्रेणी में सुर्खेत और दांग जिले शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में काठमांडू, पोखरा और दीपायल आते हैं। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग दर तय किए जाते हैं। भौगोलिक स्थिति और परिवहन लागत के आधार पर यह विभाजन किया जाता है।
पहली श्रेणी के शहर
पहलीश्रेणी में आठ प्रमुख शहर शामिल हैं। चारली, बिराटनगर और जनकपुर इसी श्रेणी में आते हैं। अमलेखगंज, भलबारी और नेपालगंज भी शामिल हैं। धनगढ़ी और बीरगंज में भी यही दर लागू होंगे।
इन शहरों में ईंधन की कीमतें सबसे कम रहती हैं। मैदानी इलाका होने के कारण परिवहन लागत कम होती है। आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक सुचारू रहती है। इसलिए यहां कीमतों में छूट का सीधा लाभ मिलेगा।
दूसरी और तीसरी श्रेणी
दूसरीश्रेणी में सुर्खेत और दांग जिले आते हैं। ये पहाड़ी इलाके हैं इसलिए यहां कीमतें अलग होती हैं। तीसरी श्रेणी में काठमांडू और पोखरा जैसे शहर शामिल हैं। दीपायल भी इसी श्रेणी में आता है।
पहाड़ी इलाकों में परिवहन लागत अधिक होती है। इसलिए इन क्षेत्रों में ईंधन की कीमतें ज्यादा रहती हैं। नई कटौती के बाद यहां भी कीमतों में कमी आएगी। हालांकि मैदानी इलाकों की तुलना में दरें अधिक रह सकती हैं।
केरोसिन की कीमतों में कमी
सरकार नेकेरोसिन की कीमतों में भी कटौती की है। यह कदम ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है। केरोसिन अभी भी कई परिवारों के लिए रसोई ईंधन का मुख्य स्रोत है। कीमत कम होने से इन परिवारों को राहत मिलेगी।
विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में केरोसिन की मांग अधिक है। बिजली की अनुपलब्धता के कारण लोग इस पर निर्भर हैं। सरकार ने इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। इससे ऊर्जा सुरक्षा को भी बल मिलेगा।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य
ईंधन कीकीमतों में कमी से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण मिल सकता है। परिवहन लागत कम होने से वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहेंगी। उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी। आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में गिरावट को देखते हुए लिया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दरों में स्थिरता है। भविष्य में और समायोजन की संभावना बनी रहेगी। सरकार जनता के हित में निर्णय लेती रहेगी।

