टांडा मेडिकल कॉलेज में वीरवार सुबह से मरीजों के ब्लड सेम्पल अटके हुए हैं और साथ अटकी हुई नन्हे बच्चों संग अन्य मरीजों की सांसे। कड़कती ठंड में मरीजों के परिजनों का खून खौल रहा है तो सिस्टम की रगों का खून जमा हुआ है। सिस्टम की डैड बॉडी में कोई हरकत नजर नहीं आ रही है।

सुबह से मरीजों की टोलियां कमरा नम्बर 603 और 633 के बीच बौखलाई हुई घूम रहीं है मगर ब्लड सेम्पल कलेक्ट कर उनकी जांच करने वाला कोई नहीं है। हैरानी की बात यह है कि सुबह नौ बजे के सेम्पल लिए गए हैं और सुबह भी दोपहर में बदल गई है, पर मरीजों-परिजनों की जिंदगी नहीं बदल रही है। इन टेस्ट में कई दुधमुंहे बच्चे ऐसे हैं भी हैं जो हाल-फिलहाल ही आईसीयू से बाहर लाए गए हैं। उनका अगला इलाज टेस्ट न हो पाने की वजह से रुका हुआ है।

इस बाबत जब एमएस ऑफिस में सम्पर्क किया गया तो साहब ने पहले यह कह कर पीछा छुड़वाने की कोशिश कि,” सब सुचारू है,गलत सूचना है।” जब उनको सबूत के तौर पर भटक रहे मरीजों के परिजनों की फोटोग्राफ्स और वीडियो भेजने की बात कि तो साहब ने ठीक वैसे ही फोन पटक दिया जिस तरह मरीजों के परिजन बाहर ठंड में सिस्टम की दहलीज पर अभी सिर पटक रहे हैं।

खबर लिखे जाने तक माहौल तनाव भरा बना हुआ है। आम आदमी का सहारा आम आदमी ही है। आप भी आवाज बुलंद करें । सिस्टम को जगाएं,छोटे बच्चों के लिए दुआ करें और सिस्टम को यह बताएं कि आपकी व्यवस्थाएं मरी हैं,आम आदमी की सवेंदनाएँ नहीं…

By RIGHT NEWS INDIA

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