New Delhi News: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नीट पीजी-2025 के कटऑफ में ऐतिहासिक बदलाव किया है। राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड (NBEMS) ने कटऑफ अंकों में भारी कटौती का फैसला लिया है। यह निर्णय दो राउंड की काउंसलिंग के बाद भी 18,000 से ज्यादा सीटें खाली रहने के कारण लिया गया है। इस फैसले से अब एमडी (MD), एमएस (MS) और पीजी डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लेना आसान हो जाएगा।
जनरल और रिजर्व कैटेगरी का नया कटऑफ
एनबीईएमएस द्वारा जारी नोटिस ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। सामान्य श्रेणी (General Category) के लिए नीट पीजी का कटऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर सीधे 7 पर्सेंटाइल कर दिया गया है। वहीं, आरक्षित श्रेणियों (Reserved Categories) के लिए यह नियम और भी लचीला हो गया है। इन श्रेणियों के लिए क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल को 40 से घटाकर शून्य (0) कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू होगी।
क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) कोर्सेज की 18,000 से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने 12 जनवरी को सरकार से ‘क्वालिफाइंग कट-ऑफ’ में संशोधन की अपील की थी। उनका तर्क था कि सीटें खाली रहने से देश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी होगी। साथ ही, यह बहुमूल्य शैक्षिक संसाधनों की बर्बादी है। इस संशोधन का मुख्य मकसद उपलब्ध सीटों का 100% उपयोग सुनिश्चित करना है।
एडमिशन प्रक्रिया और नियम
कटऑफ घटने का मतलब यह नहीं है कि एडमिशन प्रक्रिया में कोई ढील दी जाएगी। एनबीईएमएस ने स्पष्ट किया है कि नीट-पीजी एक रैंकिंग सिस्टम के रूप में ही काम करेगा।
- दाखिले पूरी तरह से मेरिट (Merit) के आधार पर ही होंगे।
- सीटों का आवंटन नीट-पीजी रैंक और अभ्यर्थी की वरीयता (Choice Filling) पर निर्भर करेगा।
- एडमिशन केवल अधिकृत सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग के जरिए ही मिलेंगे।
- कॉलेजों को किसी भी तरह के सीधे (Direct) या विवेकाधीन दाखिले की अनुमति नहीं होगी।
