Mumbai News: बीजेपी नेता नवनीत राणा के लिए बुधवार (07 जनवरी 2026) का दिन बेहद राहत भरा रहा। मुंबई की एक अदालत ने उन्हें बहुचर्चित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में आरोपमुक्त कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट (मजगांव कोर्ट) ए. ए. कुलकर्णी ने नवनीत राणा की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने खुद को आरोपमुक्त करने का आग्रह किया था। फिलहाल इस फैसले का विस्तृत आदेश अभी सामने नहीं आया है, लेकिन पूर्व सांसद के लिए यह एक बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है।
पिता की मुश्किलें अभी नहीं होंगी कम
भले ही कोर्ट ने नवनीत राणा को राहत दे दी हो, लेकिन उनके पिता हरभजन सिंह कुंडलेस को अभी कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उनके पिता के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है। उस दिन उनके पिता के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे। यानी बेटी को क्लीन चिट मिल गई है, लेकिन पिता को अभी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी।
क्या था दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप?
यह पूरा विवाद मुंबई के मुलुंड पुलिस थाने में दर्ज एक शिकायत से शुरू हुआ था। पुलिस में दी गई शिकायत के अनुसार, नवनीत राणा और उनके पिता ने जाति प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए दस्तावेजों में कथित तौर पर गड़बड़ी की थी। यह सब अमरावती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए किया गया था। अमरावती सीट अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है। इसी वजह से उनकी जाति और प्रमाण पत्र को लेकर सवाल उठाए गए थे।
हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चला मामला
इस मामले में नवनीत राणा को कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। साल 2021 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था। उस वक्त कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह प्रमाण पत्र जाली दस्तावेजों के आधार पर धोखे से बनवाया गया है।
हालांकि, अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनका अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बहाल कर दिया था। इस फैसले के बाद ही वह लोकसभा चुनाव लड़ने के योग्य हो पाई थीं। नवनीत राणा 2019 से 2024 तक अमरावती से निर्दलीय सांसद रहीं। बाद में वह बीजेपी में शामिल हुईं और 2024 का चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
