World News: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति Donald Trump के एक बयान ने यूरोप में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के बिना नाटो (NATO) कुछ भी नहीं है। इस बार यूरोप ने यह बात चुपचाप नहीं सुनी है। फ्रांस ने अब अमेरिका को कड़ा जवाब देने की तैयारी कर ली है। वहां की संसद में नाटो की मिलिट्री कमांड से बाहर निकलने का प्रस्ताव पेश किया गया है। यह अमेरिका के लिए खतरे की घंटी है।
फ्रांस की संसद में उठी बगावत की आवाज
फ्रांस की नेशनल असेंबली की उपाध्यक्ष क्लेमेंस गुएट ने एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया है। इसमें साफ कहा गया है कि फ्रांस को नाटो की ‘इंटीग्रेटेड मिलिट्री कमांड’ से हटने की योजना बनानी चाहिए। यह वह सिस्टम है जहां अमेरिका रणनीति बनाता है और यूरोप उसे मानता है। Donald Trump के बयानों के बाद फ्रांस अब अमेरिकी आदेशों को मानने के मूड में नहीं है। फ्रांस का तर्क है कि नाटो अब केवल अमेरिका के हितों के लिए काम करने वाला गुट बन गया है।
अमेरिका के लिए क्यों खतरनाक है यह संकेत?
फ्रांस का कहना है कि नाटो यूरोप की सुरक्षा से ज्यादा अमेरिकी राजनीति को महत्व देता है। फ्रांस एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और यूएनएससी का स्थाई सदस्य भी है। उसके पास यूरोप की सबसे ताकतवर सेना है। अगर फ्रांस नाटो से दूरी बनाता है, तो यह Donald Trump और अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका होगा। फ्रांस ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी अमेरिका के आक्रामक रुख का खुलकर विरोध किया है।
प्रतिबंध लगाने तक की हो रही मांग
यूरोप अब अमेरिकी विस्तारवाद का बोझ उठाने को तैयार नहीं है। यूरोपीय यूनियन की संसद में भी Donald Trump की नीतियों के खिलाफ गुस्सा दिख रहा है। वहां के कई सांसद अमेरिका के साथ व्यापार समझौते रोकने की मांग कर रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका के खिलाफ जवाबी प्रतिबंध लगाने की बातें भी हो रही हैं। यह विवाद बताता है कि यूरोप अब अपनी सुरक्षा और सम्मान के साथ समझौता नहीं करेगा।

