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नंदपुर गांव का कुत्ता: हनुमान मूर्ति की चौथे दिन भी परिक्रमा, ग्रामीणों ने शुरू किया भंडारा, पशु चिकित्सकों ने बताया ये संभावित कारण

Uttar Pradesh News: बढ़ापुर रोड स्थित गांव नंदपुर में एक कुत्ता चार दिन से लगातार हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा कर रहा है। इस असामान्य घटना ने पूरे गांव को आस्था और कौतूहल से भर दिया है। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में भंडारा शुरू कर दिया है। पशु चिकित्सकों की जांच के बाद पता चला है कि कुत्ते में रेबीज के कोई लक्षण नहीं हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह व्यवहार फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर के कारण हो सकता है।

मंदिर के देखरेख करने वाले तुषार सैनी के मुताबिक यह घटना रविवार से शुरू हुई। सोमवार की सुबह उन्होंने पहली बार कुत्ते को मूर्ति के चक्कर लगाते देखा। उन्होंने उसे भगाने की कोशिश की लेकिन कुत्ता नहीं गया। चौथे दिन भी वह लगातार परिक्रमा करता रहा। इस दौरान उसने बहुत कम खाना खाया है।

गांव वालों ने कुत्ते के लिए दूध और रोटी रखी। लोगों की भीड़ उसे देखने के लिए जुटने लगी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोग इसे एक चमत्कारिक घटना मान रहे हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने मंदिर में भंडारा करने का फैसला किया।

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजनीश कुमार की टीम ने कुत्ते का स्वास्थ्य परीक्षण किया। उन्होंने पुष्टि की कि कुत्ता शारीरिक रूप से स्वस्थ है। रेबीज जैसी कोई बीमारी नहीं पाई गई। कुत्ते के व्यवहार के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

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फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर हो सकता है कारण

डॉक्टरों का प्रारंभिक अनुमान है कि कुत्ते को फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर हो सकता है। यह एक तरह का मस्तिष्क विकार है। इस स्थिति में जानवर बार-बार एक ही तरह की हरकत करता रहता है। उसका व्यवहार बदल जाता है और वह दिशाहीन हो सकता है।

इस विकार में मस्तिष्क का अगला हिस्सा प्रभावित होता है। इसके कारणों में उम्र बढ़ना, संक्रमण, मस्तिष्क में सूजन या सिर में चोट शामिल हैं। सही निदान के लिए एमआरआई जैसे उन्नत परीक्षण जरूरी हैं। फिलहाल कुत्ते की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

कुत्ते ने तीसरे दिन थोड़ा दूध पीकर आराम किया। फिर वह फिर से परिक्रमा में लग गया। उसकी इस लगन ने सभी को हैरान कर दिया है। मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है और ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है।

स्थानीय लोग इस घटना को धार्मिक नजरिए से देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह कोई दिव्य संकेत है। भंडारे की तैयारियां जोरों पर हैं। दूर-दूर से लोग इस अद्भुत नजारे को देखने आ रहे हैं।

पशु चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक की जांच में कुत्ता पूरी तरह सुरक्षित है। वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। उसके व्यवहार का वैज्ञानिक कारण ढूंढा जा रहा है। एमआरआई रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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क्या है फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर

फ्रंट ब्रेन डिसआर्डर मस्तिष्क के अगले हिस्से को प्रभावित करता है। इससे जानवर के व्यवहार और चेतना में बदलाव आता है। वह गोल-गोल घूम सकता है या एक ही काम दोहरा सकता है। उसकी भूख भी प्रभावित होती है।

यह समस्या उम्र बढ़ने या चोट लगने से हो सकती है। मस्तिष्क में संक्रमण या सूजन भी एक कारण है। पशु चिकित्सक सीटी स्कैन या एमआरआई से सही कारण पता करते हैं। कारण के आधार पर ही इलाज संभव है।

कुछ मामलों में दवाओं से मदद मिलती है। गंभीर स्थिति में सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है। समय पर निदान और इलाज जरूरी है। पालतू जानवरों में ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

यह घटना वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आस्था के बीच एक दिलचस्प बहस खड़ी करती है। एक तरफ ग्रामीणों की श्रद्धा है तो दूसरी तरफ चिकित्सकीय विश्लेषण है। दोनों ही पक्ष अपने-अपने तरीके से इस स्थिति को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

कुत्ता अभी भी मंदिर परिसर में है। उसकी देखभाल की जा रही है। पशु चिकित्सकों की टीम उस पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में उसकी एमआरआई रिपोर्ट सामने आएगी। तब इस रहस्यमय व्यवहार का सही कारण पता चल सकेगा।

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