इंसान आज मंगल पर पहुंच गया है लेकिन धरती पर ही ऐसी कई चीजें हैं जो वैज्ञानिकों को हैरान कर रही हैं। मैटर और एनर्जी के कुछ रूप हैं जिन्हें फिजिक्स का आधार माना जाता है और इनसे कई सिद्धांत निकलते हैं। इन्हीं पर ब्रह्मांड की बड़ी से बड़ी पहेलियों के जवाब ढूंढे जाते हैं। अब फर्मी नैशनल ऐक्सिलरेटर लैबोरेटरी (Fermilab) के एक्सपेरिमेंट में पाया गया है कि एक सबअटॉमिक पार्टिकल ऐसा भी है जो फिजिक्स के अब तक के ज्ञात सिद्धांतों का पालन नहीं करता। इससे संकेत मिलता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति और प्रकृति के लिए अहम मैटर और एनर्जी के ऐसे रूप भी हैं जिनके बारे में हमें अभी पता ही नहीं है। आइए जानते हैं पूरा मामला….

​ब्रह्मांड का एक अहम हिस्सा हैं सबअटॉमिक पार्टिकल

ये सबअटॉमिक पार्टिकल होते हैं muon जो इलेक्ट्रॉन जैसे होते हैं लेकिन उनसे भारी होते हैं। ये ब्रह्मांड का एक अहम हिस्सा होते हैं। लैब के फिजिसिस्ट क्रिस पॉली और सात देशों के 200 फिजिसिस्ट्स की टीम ने पाया है कि ये पार्टिकल लैब में चुंबकीय क्षेत्र से गुजरने पर उम्मीद से अलग बिहेव करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कंटकी की फिजिसिस्ट रेने फतेमी के मुताबिक इस एक्सपेरिमेंट से इस बात का सबूत मिला है कि muon किसी ऐसी चीज के लिए संवेदनशील हैं जो हमारे अब तक की थिअरी में शामिल नहीं है। Muon g-2 नाम के एक्सपेरिमेंट के शुरुआती नतीजे पहले के एक्सपेरिमेंट्स से मिलते-जुलते हैं। ब्रुकहेवन नैशनल लैबोरेटरी में 2001 में किए गए एक्सपेरिमेंट में ऐसा ही कुछ मिलने के बाद से फिजिक्स की दुनिया में हलचल थी।

​Muons को सुपरकंडक्टिंग रिंग में चक्कर लगाते भेजा गया

डॉ. पॉली ने बताया कि नतीजों के ग्राफ में वाइट स्पेस से पता चलता है कि कहां नए एक्सपेरिमेंट में नतीजे उम्मीद से अलग हुए। वहीं, यह भी साफ किया गया है कि इन नतीजों के इत्तेफाकन होने की संभावना 40 हजार में से सिर्फ एक है। और ज्यादा डेटा के आधार पर इसकी पूरी तरह से पुष्टि की जा सकेगी। बुधवार को प्रकाशित डेटा सिर्फ 6% है और पूरा डेटा आने में अभी सालों लगेंगे। Muons को कभी-कभी फैट-इलेक्ट्रॉन भी कहते हैं। ये हमारी बैटरी, लाइट और कंप्यूटर में मौजूद पार्टिकल्स जैसे होते हैं। इनमें spin नाम की प्रॉपर्टी होती है जिससे ये चुंबक की तरह काम करते हैं। इसकी वजह से ये खूब हिलते हैं लेकिन ताजा नतीजों में ये उम्मीद से ज्यादा हिलते दिखे। इस एक्सपेरिमेंट में Muons को एक सुपरकंडक्टिंग रिंग में चक्कर लगाते भेजा गया था।

​डार्क मैटर जैसी पहेलियों के मिल सकते हैं जवाब

नतीजों के आधार पर माना जा रहा है कि कुछ ऐसे पार्टिकल्स होंगे जिन्हें सबअटॉमिक पार्टिकल्स की अब तक की थिअरी में शामिल नहीं किया गया है। इनके असर से Muons रिंग के अंदर ऐसे हिल रहे हैं। अभी तक स्टैंडर्ड मॉडल के आधार पर काम किया जाता रहा है जिसमें CERN के लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर जैसे हाई-एनर्जी पार्टिकल जैसे एक्सपेरिमेंट के नतीजों को समझा जा सकता है लेकिन इसमें ब्रह्मांड से जुड़े कई सवालों के जवाब नहीं मिलते। नए एक्सपेरिमेंट से डार्क मैटर जैसी पहेलियों के जवाब मिल सकते हैं। ये इलेक्ट्रॉन्स से 207 गुना भारी होते हैं। ये अस्थिर होते हैं और रेडियोऐक्टिव तरीके से इलेक्ट्रॉन्स और सुपर-लाइट पार्टिकल्स न्यूट्रीनो में सिर्फ एक सेकंड के 22 लाखवें हिस्से में डिके (decay) हो जाते हैं। पहली बार इनकी खोज 1936 में की गई थी।

By RIGHT NEWS INDIA

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