Michigan News: मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि चंद्रमा हर साल 3.8 सेंटीमीटर की दर से पृथ्वी से दूर हो रहा है। भौतिकी और खगोल विज्ञानी डॉ. स्टीफन डिकर्वी के अनुसार, इसके कारण पृथ्वी के घूमने की गति धीमी हो रही है, जिससे भविष्य में दिन लंबे हो सकते हैं। चंद्रमा के इस पलायन का मुख्य कारण ज्वार-भाटा की शक्तियां हैं जो चंद्रमा की कक्षा को धीरे-धीरे बढ़ा रही हैं।
चंद्रमा का निर्माण आज से लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले हुआ था जब मंगल ग्रह के आकार का एक प्रोटोप्लैनेट पृथ्वी से टकराया था। इस टक्कर के बाद अंतरिक्ष में फैले मलबे से चंद्रमा का निर्माण हुआ। प्रारंभ में चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब था और आकाश में बहुत बड़ा दिखाई देता था। जीवाश्म विज्ञानियों के अध्ययन से पता चलता है कि डायनासोर के समय में पृथ्वी का एक दिन केवल 23.5 घंटे का हुआ करता था।
चंद्रमा के दूर जाने का वैज्ञानिक कारण
डॉ. डिकर्बी ने बताया कि ज्वार-भाटे के कारण चंद्रमा हमसे दूर होता जा रहा है। पृथ्वी के महासागर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से प्रभावित होते हैं, जिसके कारण दो उभार बनते हैं। एक उभार चंद्रमा की ओर होता है जहां गुरुत्वाकर्षण बल सबसे प्रबल होता है, जबकि दूसरा उभार चंद्रमा से दूर होता है जहां यह बल सबसे कमजोर होता है। ये तरल उभार चंद्रमा के साथ पूरी तरह संरेखित नहीं होते।
पृथ्वी के घूमने के कारण ये उभार चंद्रमा से आगे की ओर खिंच जाते हैं। इस खिंचाव के कारण चंद्रमा की गति बढ़ जाती है, जिससे उसकी कक्षा का आकार बढ़ जाता है। जैसे-जैसे चंद्रमा की कक्षा बड़ी होती जाती है, वह पृथ्वी से थोड़ा दूर हो जाता है। यह प्रक्रिया लगातार जारी है और वैज्ञानिकों ने इसे सटीकता से मापा है।
चंद्रमा की दूरी मापने की विधि
वैज्ञानिक चंद्रमा की दूरी मापने के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हैं। अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा छोड़े गए दर्पणों से लेजर की मदद ली जाती है। वैज्ञानिक पृथ्वी से चंद्रमा तक लेजर किरण भेजते हैं और उसके वापस लौटने में लगने वाले समय को मापते हैं। प्रकाश की गति ज्ञात होने के कारण, इस समय अंतराल के आधार पर चंद्रमा की सटीक दूरी की गणना की जा सकती है।
यह मापन प्रक्रिया अत्यंत सटीक है और वैज्ञानिकों को चंद्रमा की दूरी में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का पता लगाने में सक्षम बनाती है। नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार इस प्रकार के मापन करती रहती हैं ताकि चंद्रमा की गति और कक्षा में होने वाले परिवर्तनों पर नजर रखी जा सके।
पृथ्वी के घूर्णन पर प्रभाव
चंद्रमा के दूर जाने का सीधा प्रभाव पृथ्वी के घूर्णन पर पड़ रहा है। चूंकि पृथ्वी चंद्रमा की गति बढ़ाने का कार्य कर रही है, इसलिए पृथ्वी का घूमना धीमा हो जाता है। इसका अर्थ है कि जैसे-जैसे चंद्रमा दूर होता जाएगा, एक दिन में सेकंड, मिनट और अंततः घंटों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। यह प्रक्रिया बेहद धीमी गति से हो रही है।
वर्तमान में चंद्रमा पृथ्वी से 3,84,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्रतिवर्ष 3.8 सेंटीमीटर की दूरी बढ़ना इस कुल दूरी का केवल 0.00000001 प्रतिशत है। इसलिए यह प्रभाव मानव जीवनकाल में नगण्य है। डॉ. डिकर्बी के अनुसार, लाखों वर्षों तक ग्रहण, ज्वार-भाटा और 24 घंटे के दिन सामान्य रूप से चलते रहेंगे।
भविष्य के संभावित प्रभाव
चंद्रमा के दूर जाने की यह प्रक्रिया भविष्य में जारी रहेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, अरबों वर्षों बाद चंद्रमा इतना दूर हो जाएगा कि यह पृथ्वी से बहुत छोटा दिखाई देगा। इससे ज्वार-भाटा की शक्ति में कमी आएगी और पृथ्वी का घूर्णन और भी धीमा हो सकता है। हालांकि, यह सब बहुत लंबे समय में होगा।
सौर मंडल के विकास और गतिशीलता का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के लिए यह शोध महत्वपूर्ण है। यह हमें ग्रहों और उनके उपग्रहों के बीच के जटिल संबंधों को समझने में मदद करता है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है और भविष्य के शोधों के लिए नई दिशाएं खोलता है।

