Washington News: भारत ने अमेरिका को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक ‘लाठी’ की गूंज अब वाइट हाउस तक सुनाई दे रही है। भारत द्वारा लगाए गए जवाबी टैक्स (Tariff) से अमेरिकी किसान परेशान हो गए हैं। हालात यह हैं कि अमेरिकी सांसदों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास गुहार लगानी पड़ी है। वे भारत से राहत की मांग कर रहे हैं।
‘जैसे को तैसा’ वाली कार्रवाई
मामले की शुरुआत अमेरिका की तरफ से हुई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर 50% तक का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया। भारत ने भी इस पर पलटवार करने में देर नहीं लगाई। भारत ने अमेरिका से आने वाली दालों और फलियों पर तुरंत 30% जवाबी टैक्स ठोक दिया। भारत के इस सख्त कदम से अमेरिकी कृषि बाजार बिलबिला उठा है।
ट्रंप के पास पहुंची ‘इमरजेंसी’ चिट्ठी
अमेरिकी सेनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक चिट्ठी लिखी है। सेनेटर वहां की संसद में अपने राज्यों के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं। इस चिट्ठी में ट्रंप से अपील की गई है कि वे प्रधानमंत्री मोदी से बात करें। सेनेटरों ने मांग की है कि भारत द्वारा पीली मटर और दालों पर लगाया गया 30% टैक्स हटाया जाए। वे चाहते हैं कि ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौते’ में अमेरिकी किसानों के फायदे वाले नियम जोड़े जाएं।
क्यों परेशान है अमेरिका?
अमेरिका के नॉर्थ डकोटा और मॉनटाना राज्यों में मटर और दालों की सबसे ज्यादा खेती होती है। इन राज्यों के किसान अपनी फसल बेचने के लिए भारत पर निर्भर हैं। आंकड़े बताते हैं कि:
- भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
- वैश्विक खपत का अकेले 27% हिस्सा भारत इस्तेमाल करता है।
- भारत के कड़े टैक्स से अमेरिकी किसानों का माल बिकना मुश्किल हो गया है।
भारत अपने किसानों के साथ खड़ा
भारत के लिए दालों का मुद्दा सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। यह गरीब की थाली का आधार है। पिछले कुछ सालों में भारत में दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ा है। सरकार एमएसपी (MSP) पर किसानों से खरीद कर रही है। ऐसे में भारत सरकार विदेशी दालों पर टैक्स लगाकर अपने किसानों को सुरक्षा दे रही है। अमेरिकी सेनेटर अब चाहते हैं कि भारत अपना बाजार उनके लिए फिर से खोल दे।

