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बुद्ध पूर्णिमा 2021; बुद्ध जयंती के लाइव से जुड़ेंगे प्रधानमंत्री, जाने बुद्ध पूर्णिमा के बारे


इस साल बुद्ध जयंती बुधवार यानी 26 मई को मनाई जाएगी। दुनिया भर के बौद्ध और हिंदू गौतम बुद्ध के जन्म को बुद्ध जयंती के रूप में मनाते हैं। सिद्धार्थ गौतम का जन्म राजकुमार के रूप में 563 ईसा पूर्व में पूर्णिमा के दिन हुआ था। गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी (आधुनिक नेपाल में एक क्षेत्र) में हुआ था। पूर्णिमा के दिन जन्म होने की वजह से उनकी जयंती के दिन को बुद्ध पूर्णिमा या वैसाखी बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक के रूप में भी जाना जाता है। बुद्ध जयंती 2021 में भगवान बुद्ध की 2583वीं जयंती होगी। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। श्रीलंका, म्यांमार, कंबोडिया, जावा, इंडोनेशिया, तिब्बत, मंगोलिया में बुद्ध जयंती के विशेष दिन को एक उत्सव के तौर पर ‘वेसाक’ के रूप में मनाते हैं।

बुद्ध जयंती की तारीख एशियाई चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित है, इसलिए हर साल ये अलग-अलग तारीखों पर होती है। हालांकि यह आमतौर पर पूर्णिमा के दिन वैशाख के हिंदू महीने में पड़ता है, पश्चिमी ग्रेगोरियन कैलेंडर में तारीख अलग-अलग होती है।

बिहार के गया में स्थित बोधगया महाबोधि मंदिर में 26 मई को बुद्ध पूर्णिमा पर्व के लाइव प्रसारण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जुड़ेंगे। देश में कोरोना के प्रकोप को देखते हुए बुद्ध पूर्णिमा का ये कार्यक्रम आनलाइन रखा गया है। पीएम नरेंद्र मोदी इस खास मौके पर बौद्ध अनुयायियों को संबोधित भी कर सकते हैं। लाइव प्रसारण में भारत, नेपाल, वियतनाम, भूटान, श्रीलंका, मंगोलिया से लाइव प्रार्थना किया जाएगा।

बुद्ध पूर्णिमा तिथि – बुधवार, 26 मई, 2021

पूर्णिमा तिथि शुरू – 25 मई 2021 को 08:29 PM

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 26 मई 2021 को शाम 04:43 बजे

गौतम बुद्ध का जन्म सिद्धार्थ गौतम के रूप में एक राजकुमार के रूप में हुआ था। अधिकांश लोग लुंबिनी, नेपाल को बुद्ध का जन्म स्थान मानते हैं। ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया था और उन्होंने सबसे पहले सारनाथ में धर्म की शिक्षा दी थी।

बौद्धों के लिए, बोधगया गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। बौद्धों के लिए अन्य तीन महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में शामिल हैं – कुशीनगर, लुंबिनी और सारनाथ। बुद्ध पूर्णिमा के दिन बौद्ध धर्म के अनुयायी भगवान बुद्ध से प्रार्थना करते हैं और उनका आशीर्वाद लेने के लिए तीर्थ स्थलों पर जाते हैं।

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