प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व और 1971 की बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना के योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद और प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ देश की स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम ने बताया कि उन्होंने भी बांग्लादेश की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था।

… तब मैं 20-22 साल का था
उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष में शामिल होना मेरे जीवन के भी पहले आंदोलनों में से एक था। मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था। बांग्लादेश की आजादी के समर्थन में तब मैंने गिरफ्तारी भी दी थी और जेल जाने का अवसर भी आया था। यानि बांग्लादेश की आजादी के लिए जितनी तड़प इधर थी, उतनी ही तड़प उधर भी थी।’

भारतीय सेना के पराक्रम को किया याद
नेशनल परेड स्क्वायर पर बांग्लादेश की आजादी की स्वर्ण जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने उसकी आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना की भूमिका को याद किया और कहा कि बांग्लादेश में अपनी आजादी के लिए लड़ने वालों और भारतीय जवानों का रक्त साथ-साथ बहा था और रक्त ऐसे संबंधों का निर्माण करेगा जो किसी भी दबाव से टूटेगा नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज भारतीय सेना के उन वीर जवानों को भी नमन करता हूं जो मुक्ति संग्राम में बांग्लादेश के भाई-बहनों के साथ खड़े हुये थे। जिन्होंने मुक्ति संग्राम में अपना लहू दिया, अपना बलिदान दिया, और आज़ाद बांग्लादेश के सपने को साकार करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।’’

बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान के सम्मान में ‘मुजीब जैकेट’ पहने मोदी ने कहा कि बंगबंधु का नेतृत्व और उनकी बहादुरी ने सुनिश्चित किया कि कोई भी ताकत बांग्लादेश को दास बनाकर नहीं रह सकती।

उन्होंने कहा, ‘आप सभी का ये स्नेह मेरे जीवन के अनमोल पलों में से एक है। मुझे खुशी है कि बांग्लादेश की विकास यात्रा के इस अहम पड़ाव में, आपने मुझे भी शामिल किया। हम भारतवासियों के लिए गौरव की बात है कि हमें शेख मुजीबुर रहमान जी को गांधी शांति पुरस्कार देने का अवसर मिला।’ इसी सप्ताह मुजीबुर रहमान को मरणोपरांत गांधी शांति पुरस्कार से नवाजे जाने की घोषणा हुई थी।

समारोह की शुरुआत में मोदी ने कहा, ‘‘बंधुगण, मैं आज बांग्लादेश के उन लाखों बेटे बेटियों को याद कर रहा हूं, जिन्होंने अपने देश, अपनी भाषा, अपनी संस्कृति के लिए अनगिनत अत्याचार सहे, बंगबंधु की बेटियों प्रधानमंत्री हसीना और शेख रेहाना को गांधी शांति पुरस्कार सौंपा।

1971 के युद्ध को याद करते हुए मोदी ने कहा कि यहां पाकिस्तान की सेना ने जो जघन्य अपराध और अत्याचार किए वो तस्वीरें विचलित करती थीं और भारत में लोगों को कई-कई दिन तक सोने नहीं देती थीं।

जब अपने ही लोगों पर पाक ने ढाए जुल्म
25 मार्च 1971 की मध्य रात्रि को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने अचानक हमला बोल दिया। यह लड़ाई 16 दिसंबर को समाप्त हुई। लगभग नौ महीने तक चली इस लड़ाई में 30 लाख लोग मारे गए थे। मोदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के पास लोकतंत्र की शक्ति है और भविष्य की दृष्टि है तथा क्षेत्र के लिए यह आवश्यक है कि दोनों देश साथ-साथ प्रगति करें। उन्होंने कहा, ‘इसलिए भारत और बांग्लादेश की सरकारें इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रही हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक सुखद संयोग ही है कि बांग्लादेश की आजादी के 50 वर्ष और भारत की आजादी के 75 वर्ष का पड़ाव, एक साथ ही आया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों ही देशों के लिए 21वीं सदी में अगले 25 वर्षों की यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है। हमारे लक्ष्य भी साझे हैं, हमारी चुनौतियां भी साझी हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें याद रखना है कि व्यापार और उद्योग में जहां हमारे लिए एक जैसी संभावनाएं हैं तो आतंकवाद जैसे समान खतरे भी हैं। जो सोच और शक्तियां इस प्रकार की अमानवीय घटनाओं को अंजाम देती हैं, वो अब भी सक्रिय हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी शक्तियों से सावधान भी रहना चाहिए और उनसे मुकाबला करने के लिए संगठित भी रहना होगा। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही देशों की सरकारें इस संवेदनशीलता को समझकर इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने दिखा दिया है कि आपसी विश्वास और सहयोग से हर एक समाधान हो सकता है। हमारा भूमि सीमा समझौता भी इसी का गवाह है। कोरोना के इस कालखंड में भी दोनों देशों के बीच बेहतरीन तालमेल रहा है।’’

कोरोना महामारी के दौरान दोनों देशों के बीच परस्पर सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और बांग्लादेश का भविष्य, सद्भाव भरे, आपसी विश्वास भरे ऐसे ही अनगिनत पलों का इंतजार कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘भारत-बांग्लादेश के संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों ही देशों के युवाओं में बेहतर संपर्क की भी उतना ही आवश्यकता है।’ भारत-बांग्लादेश संबंधों के 50 वर्ष के अवसर पर उन्होंने बांग्लादेश के 50 उद्यमियों को भारत आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, ‘ये उद्यमी भारत आयें, हमारे स्टार्ट-अप और नवाचार के तंत्र से जुड़ें। हम भी उनसे सीखेंगे, उन्हें भी सीखने का अवसर मिलेगा।’

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश के युवाओं के लिए स्वर्ण जयंती स्कॉलरशिप की घोषणा भी की। प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि शेख हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश दुनिया में अपना दमखम दिखा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों को बांग्लादेश के निर्माण पर एतराज था, जिन लोगों को बांग्लादेश के अस्तित्व पर आशंका थी, उन्हें बांग्लादेश ने गलत साबित किया है।’ उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के पास गंवाने के लिए अब समय नहीं है और बदलाव के लिए दोनों देशों को आगे बढ़ना ही होगा।

उन्होंने कहा, ‘अब हम और देर नहीं कर सकते। ये बात भारत और बांग्लादेश दोनों पर समान रूप से लागू होती है। अपने करोड़ों लोगों के लिए, उनके भविष्य के लिए, गरीबी के खिलाफ हमारे युद्ध के लिए, आतंक के खिलाफ लड़ाई के लिए, हमारे लक्ष्य एक हैं, इसलिए हमारे प्रयास भी इसी तरह एकजुट होने चाहिए। मुझे विश्वास है भारत-बांग्लादेश मिलकर तेज गति से प्रगति करेंगे।’

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