मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है, जहां एक 14 साल की नाबालिग बलात्कार पीड़िता 3 महीने बाद मां बनेगी। इतना ही नहीं, जिस नाबालिक बच्ची के साथ बलात्कार जैसा जघन्य अपराध हुआ, उसे और उसके परिवार को उसके ही समाज ने बहिष्कृत कर दिया।पिछले 5 माह से बलात्कार पीड़िता और उसका परिवार जाति प्रमाण पत्र के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, ताकि उन्हें कुछ मुआवजा राशि मिल सके और वह उससे आगे का केस लड़ सकें लेकिन राजस्व विभाग 5 महीने बाद भी उसे जाति प्रमाण पत्र नहीं दे सका है।

घटना उस प्रदेश की है, जहां पर ‘बेटी-पढ़ाओ और बेटी-बचाओ’ जैसी योजनाएं चलाई जाती हैं, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने आप को प्रदेश की बेटियों का मामा कहते हैं। लेकिन शिवराज सिंह चौहान के उसी मध्य प्रदेश में 14 साल की एक बलात्कार पीड़िता, जिसके पेट मे 7 माह का गर्भ है, जिल्लत उठाते हुए जाति-प्रमाण पत्र के लिए जद्दोजहद कर रही है।

ये है मामला
बड़ामलहरा अनुविभाग के मुख्यालय के एक गांव में 16 सितंबर 2020 को 14 साल की नाबालिक के साथ गांव में ही रहने वाले एक युवक ने बलात्कार जैसी घटना को अंजाम दिया। आरोपी ने पीड़िता को उस समय अपनी हवस का शिकार बनाया जब पीड़िता अपने खेत में काम कर रही थी। पीड़िता की शिकायत पर 18 सितंबर 2010 को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। घटना के बाद पीड़िता और उसके परिवार का असली संघर्ष शुरू हुआ। जब कानूनी दांव पेच के बीच पीड़िता से उसका जाति प्रमाण पत्र मांगा गया।

पीड़िता के परिवार के लोगों का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र जमा करने से पीड़िता को कुछ राहत राशि मिल जाएगी, जिससे वह अपनी बेटी की डिलीवरी ठीक से करा पाएंगे। साथ ही आगे का केस भी लड़ सकेंगे। लेकिन गांव का सरपंच और बड़ा मलहरा एसडीएम पिछले 5 महीनों से नाबालिग पीड़िता का जाति प्रमाण पत्र नहीं बना सके हैं। अगर सही समय पर पीड़िता का जाति-प्रमाण पत्र नहीं बनता है तो कोर्ट में पीड़िता अपने आप को दलित साबित नहीं कर पाएगी। जिससे ना तो उसे मुआवजा मिलेगा और ना ही आरोपी पर एससी एसटी एक्ट लगेगा और कानूनन उसका मुकदमा कमजोर हो जाएगा।

दो बार हुआ बलात्कार,7 माह के गर्भ से पीड़िता
पीड़िता का कहना है कि उसके साथ आरोपी ने दो बार घटना को अंजाम दिया। पहली बार जब उसके साथ बलात्कार हुआ तब उसे आरोपी ने डरा धमका दिया था। जिसका जिक्र पीड़िता ने किसी के साथ नहीं किया और उसके दो महीने बाद यानी 16 सितंबर को पीड़िता के साथ एक बार फिर बलात्कार हुआ। पीड़िता अब 7 माह के गर्भ से है।

3 माह बाद बिन ब्याही मां बनेगी खुशी(परिवर्तित नाम)
पीड़िता 3 माह बाद बिन ब्याही मां बनेगी। ऐसे परिवार और पीड़िता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो बच्चा जन्म लेगा, उसका क्या होगा और जन्म देने के बाद पीड़िता को समाज का कितना तिरस्कार झेलना होगा। पीड़िता का कहना है कि फिलहाल वह घर से बहुत जरूरी कामों के लिए ही निकल रही है क्योंकि गांव के लोग और अन्य महिलाएं उसे हीन भावना से देखती हैं।

समाज ने किया बेदखल
पीड़िता के पिता और उसके परिवार के लोगों का कहना है कि घटना के कुछ समय बाद से ही समाज के लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया। गांव में समाज के लोगों के यहां कोई भी कार्यक्रम होता है ना तो उन्हें बुलाया जा रहा है और ना ही समाज के लोग उनके यहां आ रहे हैं। इतना ही नहीं, परिवार के लोग अगर गांव में समाज के किसी व्यक्ति के दरवाजे पर भी बैठ जाते हैं तो उन्हें वहां से भगा दिया जाता है।

क्यों नहीं बन पा रहा जाति-प्रमाण पत्र
गांव के सरपंच का कहना है कि पीड़िता के पिता ने दो शादियां की थी। पीड़िता जब 4 साल की थी तब उसका पिता उसे गांव में लेकर आया था। चूंकि अभी तक यह बात सिद्ध नहीं हो सकी है कि पीड़िता को दिल्ली से गांव लाने वाला ही उसका असली पिता है। यही वजह है कि जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है।

आधार से लेकर,राशनकार्ड, पैनकार्ड सभी दस्तावेज़ पुख्ता
गांव का सरपंच जिस बात का हवाला देते हुए पीड़िता को उसकी सगी बेटी मानने से इनकार कर रहा है, जबकि इसके ठीक विपरीत पीड़िता के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज उसी गांव के हैं, जिसमें पीड़िता और उसके पिता का नाम दर्ज है। ऐसे में यह बात दर्शाती है कि गांव का सरपंच जानबूझकर मामले को उलझा रहा है।

एसडीएम R•N गौड़ की भूमिका संदिग्ध?
पिछले 5 माह से पीड़ित और उसके परिवार के लोग जाति प्रमाण पत्र के लिए लगातार एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। गांव में सरपंच से लेकर अन्य अधिकारियों के हाथ पैर जोड़ रहे हैं। लेकिन 5 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक पीड़िता का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन सका है। संबंधित मामले में जब हमने एस डी एम R•N गौड़ से बात की तो उन्होंने कहा कि अगर पीड़िता एग्जाम कार्यालय में आकर आवेदन देती है तो निश्चित ही उस का जाति प्रमाण पत्र बन जाएगा।

ऑल इंडिया दलित अधिकार मंच ने लगाए प्रशासन पर गंभीर आरोप
ऑल इंडिया दलित अधिकार मंच में काम करने वाली सुशीला प्रजापति पिछले 7 महीनों से इस केस को स्टडी कर रही हैं। साथ ही पीड़िता और उसके परिवार को हर संभव मदद दिलाने का भी प्रयास कर रहे हैं। सुशीला का कहना है कि गांव का सरपंच से लेकर अनु विभाग के कई अधिकारी यह नहीं चाहते कि दलित युवती का जाति प्रमाण पत्र बन सके ताकि संबंधित मामले में आगे आने वाले समय में आरोपी पर और शक्ति से कानूनी कार्रवाई हो सके। सुशीला का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र बन जाने से पीड़िता को कुछ मुआवजा भी मिलेगा, जिससे वह आगे की कानूनी लड़ाई लड़ पाएगी।

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