Dewas News: मध्य प्रदेश में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक एसडीएम (SDM) को सरकारी आदेश में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विवादास्पद टिप्पणी का जिक्र करना भारी पड़ गया। प्रशासन ने रविवार को देवास के एसडीएम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह मामला इंदौर की पेयजल त्रासदी और MP News की सुर्खियों में छाए ‘घंटा’ वाले बयान से जुड़ा है। उज्जैन संभाग के आयुक्त ने इसे कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही माना है।
सरकारी आदेश में कॉपी-पेस्ट करना पड़ा भारी
अधिकारियों ने बताया कि एसडीएम ने रविवार को कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आदेश जारी किया था। इसमें अधीनस्थ अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन, एसडीएम ने गलती से कांग्रेस के ज्ञापन की लाइनों को ही सरकारी आदेश में हू-ब-हू कॉपी कर दिया। इसमें मंत्री विजयवर्गीय के बयान की आलोचना लिखी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी दस्तावेज में विपक्षी दल के आरोपों को जगह देना गंभीर अनियमितता है।
क्या है ‘घंटा’ वाला पूरा विवाद?
दरअसल, इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई है। कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया था कि जब एक टीवी पत्रकार ने इस त्रासदी पर सवाल पूछा, तो मंत्री विजयवर्गीय ने ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने इसे अमानवीय और निरंकुशता की निशानी बताया था। एसडीएम के जारी आदेश में इसी ‘अमानवीय व्यवहार’ और MP News में वायरल हुए बयान का जिक्र आ गया, जिसके बाद प्रशासन को कड़ा एक्शन लेना पड़ा।
दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी का कहर जारी है। प्रशासन ने अब तक उल्टी-दस्त के प्रकोप से छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मौतों का आंकड़ा 10 बताया था। हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि जहरीला पानी पीने से 6 महीने के बच्चे समेत 16 लोगों ने दम तोड़ा है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस, बीजेपी नेताओं के घर के बाहर ‘घंटा’ बजाकर प्रदर्शन कर रही थी, जिसकी तैयारी के दौरान यह प्रशासनिक चूक हुई।
