India Weather News: इस बार जनवरी में पूरे देश का मौसम बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि 1901 के बाद यह सबसे शुष्क ठंड का मौसम रहा है। अब हिमालयी क्षेत्र में एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टर्बेंस बन रहा है। इसके चलते 23 जनवरी को कई इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इससे ठंड और कोहरे में वृद्धि का अनुमान है।
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर से जनवरी तक का दौर हिमालय के लिए सौ साल में सबसे सूखा रहा। उत्तराखंड में इस दौरान लगभग बारिश नहीं हुई। हिमाचल प्रदेश में दिसंबर महीने में 1901 के बाद छठी बार सबसे कम वर्षा दर्ज की गई। जम्मू-कश्मीर में भी बारिश और बर्फबारी में बहुत कमी देखी गई है।
बर्फबारी में देरी के गंभीर परिणाम
विशेषज्ञोंका कहना है कि बर्फबारी में देरी का ग्लेशियरों और नदियों पर गहरा असर पड़ता है। शुरुआती सर्दियों में गिरने वाली बर्फ लंबे समय तक जमी रहती है। यह बर्फ धीरे-धीरे पिघलकर नदियों को पानी देती रहती है। देर से गिरने वाली बर्फ जल्दी पिघल जाती है। इससे जल संकट और अचानक बाढ़ दोनों का खतरा बढ़ सकता है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के सैटेलाइट डेटा के अनुसार हिमालय में पिछले 23 वर्षों में सबसे कम बर्फबारी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो बर्फबारी का मौसम और छोटा हो जाएगा। इसका प्रभाव देश की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
हिमालयी राज्यों में बर्फबारी का अनुमान
मौसम विभाग केअनुसार हिमालयी क्षेत्र में एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस बन रहा है। इसकी वजह से 21 जनवरी तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बर्फबारी हो सकती है। 22 से 24 जनवरी के बीच बड़े इलाकों में व्यापक बारिश और बर्फबारी के आसार हैं।
23 जनवरी को इस सिस्टम का सबसे अधिक असर देखने को मिल सकता है। इस दौरान हिमालयी क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भारी बर्फबारी भी हो सकती है। मौसम विभाग ने संभावित प्रभावों को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश
इस वेस्टर्न डिस्टर्बेंस काअसर उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों पर भी दिखेगा। 22 से 24 जनवरी के बीच पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में भी गरज के साथ बारिश हो सकती है।
इस बारिश से मैदानी इलाकों के तापमान में गिरावट आएगी। कोहरे की स्थिति और बढ़ सकती है। सर्दी का अहसास फिर से बढ़ जाएगा। मौसम विभाग ने बारिश के दौरान होने वाली अन्य मौसमी गतिविधियों पर भी नजर रखी है। लोगों को नवीनतम मौसम अपडेट जारी किए जा रहे हैं।
ग्लोबल वार्मिंग का ऋतु चक्र पर प्रभाव
मौसम वैज्ञानिकोंका मानना है कि इस बार की शुष्क ठंड और मौसम में आ रहे अचानक बदलाव ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का नतीजा हैं। इसका सीधा असर ऋतु चक्र पर पड़ रहा है। पारंपरिक मौसम पैटर्न बदल रहे हैं। इससे न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है।
आईएमडी के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि इस साल दिसंबर और जनवरी में वर्षा और बर्फबारी बहुत कम हुई। यह रुझान चिंताजनक है। यह लंबे समय तक चलने वाले जलवायु परिवर्तन का एक हिस्सा प्रतीत होता है। वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं।
आने वाले दिनों में मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग केमॉडल बताते हैं कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की गतिविधि 24 जनवरी के बाद कमजोर पड़ सकती है। हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी का दौर थम सकता है। मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधि भी कम हो जाएगी। इसके बाद फिर से शुष्क और ठंडे मौसम के लौटने की संभावना है।
हालांकि यह बर्फबारी लंबे समय से चले आ रहे सूखे को तोड़ने में मददगार साबित होगी। इससे हिमालयी ग्लेशियरों को कुछ राहत मिलेगी। नदियों के जल प्रवाह में भी सुधार होगा। कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह वर्षा लाभदायक सिद्ध हो सकती है।

