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मेहुल चोकसी मनी लॉन्ड्रिंग केस: अब ED ने किया बेटे रोहन पर बड़ा दावा, कहा- ‘सक्रिय रूप से शामिल’

Mumbai News: पीएनबी धोखाधड़ी मामले में भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी के बेटे रोहन चोकसी पर प्रवर्तन निदेशालय ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी ने दावा किया है कि रोहन मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल था। यह आरोप दिल्ली की अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष रखा गया। मामला मुंबई की एक जब्त संपत्ति से जुड़ा है।

रोहन चोकसी ने इस संपत्ति के खिलाफ अपील दायर की थी। उनका तर्क था कि यह संपत्ति उनके पारिवारिक ट्रस्ट की है। इसे साल 1994 में खरीदा गया था। लेकिन ईडी ने इस दावे को खारिज कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने ट्रिब्यूनल को नई जानकारी दी।

ईडी ने बताया कि मेहुल चोकसी ने 2013 में यह संपत्ति अपने बेटे को हस्तांतरित कर दी। यह कदम धोखाधड़ी के सामने आने की आशंका में उठाया गया था। ईडी का मानना है कि इसका मकसद संपत्ति को सुरक्षित करना था। एजेंसी के पास सबूत हैं जो रोहन की भूमिका को दर्शाते हैं।

रोहन चोकसी का नाम नहीं था किसी आरोपपत्र में

दिलचस्प बात यह हैकि रोहन चोकसी का नाम अब तक किसी भी एफआईआर में नहीं आया था। वह किसी चार्जशीट में भी शामिल नहीं थे। लेकिन ईडी की ताजा दलील से मामले में नया मोड़ आ गया है। इससे जांच का दायरा बढ़ सकता है। अदालत अब इस पर विचार करेगी।

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मेहुल चोकसी साल 2017 में भारत से भाग गए थे। उन पर पंजाब नेशनल बैंक को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। वह अभी बेल्जियम की जेल में बंद हैं। भारत सरकार उनके प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है। प्रक्रिया अभी भी जारी है।

ईडी ने चोकसी परिवार की संपत्तियां की हैं जब्त

प्रवर्तन निदेशालय नेइस मामले में कई संपत्तियां जब्त की हैं। इनका कुल मूल्य लगभग 2565 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ये संपत्तियां मेहुल चोकसी, उनकी कंपनियों और परिवार के सदस्यों से जुड़ी हैं। जब्ती की कार्रवाई लगातार जारी है।

जब्त की गईं संपत्तियों में मुंबई के प्रमुख इलाकों के आवासीय फ्लैट शामिल हैं। इनमें दादर ईस्ट का एक फ्लैट भी है। यह फ्लैट रोहन मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पंजीकृत है। यह फर्म इस मामले से सीधे जुड़ी हुई है।

इसी तरह वालकेश्वर रोड पर स्थित एक अन्य संपत्ति भी जब्त की गई है। इस पर रोहन चोकसी का स्वामित्व है। ईडी का मानना है कि ये संपत्तियां धोखाधड़ी से प्राप्त धन से बनी हैं। इन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जब्त किया गया है।

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ट्रस्ट के माध्यम से हुआ था संपत्ति का हस्तांतरण

ऐसेमें रोहन चोकसी की दलील महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा था कि विवादित संपत्ति पारिवारिक ट्रस्ट की है। इसलिए उसे जब्त नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन ईडी ने इसके सबूत पेश किए हैं कि हस्तांतरण बाद में हुआ।

ईडी की जांच में पता चला है कि मेहुल चोकसी ने जानबूझकर यह कदम उठाया। उन्हें आशंका थी कि उनकी धोखाधड़ी जल्द ही सामने आ जाएगी। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्तियों को सुरक्षित करने की कोशिश की। इसमें उनके बेटे रोहन की मदद ली गई।

अब न्यायाधिकरण को यह तय करना है कि संपत्ति की जब्ती सही है या नहीं। साथ ही रोहन चोकसी की शामियत पर भी फैसला होगा। इससे पूरे मामले की दिशा तय हो सकेगी। अगली सुनवाई का इंतजार है।

मेहुल चोकसी का मामला देश की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी में से एक है। इसने बैंकिंग प्रणाली में गंभीर कमजोरियों को उजागर किया था। ईडी और सीबीआई लंबे समय से इसकी जांच कर रही हैं। अब यह मामला एक नए चरण में पहुंच गया लगता है।

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