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ईरान में कत्लेआम? 12 हजार मौतों का दावा, खामेनेई की कुर्सी पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा!

Tehran News: ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते भी जारी हैं। यह प्रदर्शन अब खूनी संघर्ष में बदल चुके हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुरक्षा बलों ने अब तक 12,000 लोगों को मार डाला है। विश्लेषक इसे ईरान की सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

विपक्षी वेबसाइट का चौंकाने वाला दावा

ईरान के बाहर से चलने वाली वेबसाइट ‘ईरान इंटरनेशनल’ ने ये आंकड़े जारी किए हैं। वेबसाइट ने इसे “ईरान के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी हत्या” बताया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठन मरने वालों की संख्या कुछ सौ बता रहे हैं। लेकिन ईरान इंटरनेशनल का दावा काफी बड़ा है। उनका कहना है कि यह जानकारी ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों से मिली है।

खामेनेई के आदेश पर हुई कार्रवाई?

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हिंसा सुनियोजित थी। आरोप है कि सर्वोच्च नेता खामेनेई के आदेश पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बासिज बलों ने गोलीबारी की। सबसे ज्यादा मौतें 8 और 9 जनवरी की रात को हुईं। मरने वालों में ज्यादातर युवा हैं। उनकी उम्र 30 साल से कम बताई जा रही है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इन दावों पर अभी चुप्पी साधी हुई है।

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बाजार की हड़ताल से शुरू हुआ था बवाल

यह विरोध 28 दिसंबर को तेहरान के ऐतिहासिक बाजार में एक हड़ताल से शुरू हुआ था। शुरुआत में यह गुस्सा गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर था। लेकिन अब लोग खुलकर इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। पेरिस की प्रोफेसर निकोल ग्राजेवस्की के अनुसार, प्रदर्शनकारी अब साफ तौर पर राजनीतिक बदलाव चाहते हैं। यह 1979 की क्रांति के बाद का सबसे गंभीर संकट है।

सरकार ने इंटरनेट किया बंद

ईरान में इंटरनेट पूरी तरह ठप कर दिया गया है। इस कारण सही जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें बहुत कम आ रही हैं। सरकार ने अपनी ताकत दिखाने के लिए जवाबी रैलियां भी की हैं। सोमवार को हजारों समर्थकों ने सरकार के पक्ष में मार्च निकाला। लेकिन सड़कों पर तनाव अभी भी बरकरार है।

क्या गिर जाएगी ईरान सरकार?

जानकारों का मानना है कि आंदोलन अभी उस निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंचा है। ओटावा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस जूनो कहते हैं कि भीड़ बढ़ रही है, लेकिन यह सरकार गिराने के लिए काफी नहीं है। प्रदर्शनकारियों के पास कोई मजबूत नेता या संगठन नहीं है। वहीं, सेना और सरकार के बड़े अधिकारी अभी भी खामेनेई के साथ मजबूती से खड़े हैं। जब तक सेना या बड़े नेताओं में बगावत नहीं होती, सरकार का गिरना मुश्किल है।

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ट्रंप का दबाव और युद्ध का खतरा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान घिरता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के व्यापारिक भागीदारों पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी है। इससे पहले जून में इजरायल के साथ हुए युद्ध में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय खामेनेई को छिपना पड़ा था। विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका सीधा हमला करता है, तो हालात पूरी तरह बदल सकते हैं।

खामेनेई के बाद कौन?

ईरान में उत्तराधिकारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 86 साल के खामेनेई 1989 से सत्ता में हैं। उनके बाद गद्दी कौन संभालेगा, यह साफ नहीं है। उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे है। कुछ लोग सामूहिक नेतृत्व की बात भी कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का वर्चस्व और बढ़ जाएगा। फिलहाल ईरान का भविष्य अंधेरे में है और जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

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