अमेरिकी स्पेस एसेंजी NASA के Perseverance रोवर ने पहली बार मंगल के मौसम का हाल बताया है। मंगल के जेजेरो क्रेटर में उतरे इस रोवर ने बताया है कि रात के समय यहां तापमान माइनस में पहुंच जाता है। रोवर में फिट किए गए मार्स इनवायरमेंटर डॉयनमिक एनलाइजर (MEDA) प्रणाली ने 19 फरवरी को रात 10.25 बजे 30 मिनट के लिए अपने चारों ओर के तापमान का अध्ययन किया।

30 मिनट में 5 डिग्री घटा तापमान
Perseverance रोवर के भेजे डेटा से पता चला है कि जब इस प्रणाली को एक्टिव किया गया तब बाहर का तापमान -4 फारेनडाइट (-20 डिग्री सेल्सियस) था, लेकिन 30 मिनट में ही यह घटकर -14 फारेनहाइट (-25 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच गया। मेडा को धूल के स्तर और छह वायुमंडलीय स्थितियों को रिकॉर्ड करने के लिए छह तरह के इनवायरमेंटर सेंसर्स के साथ डिजाइन किया गया है।

मंगल पर मानव मिशन के लिए किया जाएगा इस्तेमाल
इस सेंसर में सतह पर किसी भी तरह के विकिरण को मापने की क्षमता भी है। इसके अलावा इस सेंसर से मिले डेटा के जरिए मंगल पर पहने मानव मिशन से जुड़ी तैयारियों को भी अंजाम दिया जाएगा। मेडा के प्रिसिपल इन्वेस्टिगेटर जोस एंटोनियो रोड्रिग्ज मैनफ्रेडी ने कहा कि हम इस रोवर की लैंडिंग के बाद से ही डेटा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। हमारा उपकरण सुरक्षित रूप से उतरा और अब यह डेटा भेज रहा है।

मंगल के मौसम को लेकर कर सकता है बड़ा खुलासा
जोस एंटोनियो रोड्रिग्ज मैनफ्रेडी मैड्रिड के इंस्टीट्यूटो नैशनल डी टेक्निका एयरोस्पेसियल में सेंट्रो डी एस्ट्रोबीओलिया में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जब हमें मेडा से पहली रिपोर्ट मिली तो वह पल हमारे लिए खुशी का सबसे बड़ा लम्हा था। इससे हमें आगे के कार्य और योजनाओं के लिए कई महत्वपूर्ण डेटा मिले हैं। हमारा सिस्टम काम कर रहा है और स्काईकैम से अपना पहला मौसम संबंधी डेटा और चित्र भेज रहा है।

रोवर के आर्म में फिट किया गया है सिस्टम
मेडा को Perseverance रोवर के आर्म में फिट किया गया है, जिसे दूर तक फैलाया जा सकता है। इसे आगे भी मौसम की जांच के लिए समय-समय पर बाहर निकाला जाएगा। इसका वजन लगभग साढ़े पांच किलोग्राम के आसपास है। यह हवा (गति और दिशा दोनों), दबाव, सापेक्षिक आर्द्रता, वायु तापमान, जमीन का तापमान और विकिरण (सूर्य और अंतरिक्ष दोनों से) को पकड़ने में सक्षम है।

सिस्टम ने मंगल पर प्रेशर को भी बताया
सिस्टम हर घंटे खुद रोवर से बाहर निकलता है और डेटा रिकॉर्ड करने, उसको सेव करने के बाद यह रोवर के अंदर स्लीप मोड में चला जाता है। बताया जा रहा है कि यह सिस्टम स्लीप मोड में भी डेटा इकट्ठा कर सकता है। मेडा के प्रेशर सेंसर ने बताया कि मंगल पर उस समय दबाव 718 पास्कल था, जबकि वैज्ञानिकों ने मॉडल के आधार पर उस समय 705-735 पास्कल तक का अनुमान लगाया गया था।

By RIGHT NEWS INDIA

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