New Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मणिपुर हिंसा से जुड़े मामले में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उस 48 मिनट की पूरी ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच का आदेश दे दिया है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की आवाज होने का दावा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस लीक हुई रिकॉर्डिंग की सच्चाई जानने के लिए इसकी वैज्ञानिक जांच जरूरी है। यह मामला राज्य में हुई हिंसा में पूर्व मुख्यमंत्री की कथित भूमिका से जुड़ा है।
गांधीनगर लैब में होगी जांच
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि लीक हुई पूरी ऑडियो फाइल को गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) भेजा जाए। कोर्ट ने लैब को इस प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में सौंपने का आदेश दिया है, ताकि गोपनीयता बनी रहे।
वकील प्रशांत भूषण ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की तरफ से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पेश हुए। उन्होंने बताया कि याचिका के साथ 48 मिनट की पूरी बातचीत का लिखित ब्यौरा (ट्रांसक्रिप्ट) और ऑडियो दोनों उपलब्ध कराए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सवाल उठाया था कि अब तक सभी क्लिप जांच के लिए क्यों नहीं भेजे गए। वहीं, मणिपुर सरकार की ओर से पेश हुईं एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार को पूरी रिकॉर्डिंग पिछली सुनवाई के बाद ही मिली है।
