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मणिकर्ण से पैदल अमृतसर निकले मजदूरों का स्वारघाट में छलका दर्द, चार घंटे तक रोकते रहे गाडिय़ां

साहब न खाने को पैसे बचे है न ही घर तक जाने के लिए कोई हमें वाहन में चढ़ा रहा है। दो दिन से भूखे सड़क पर सोए थे। यह कहना था अमृतसर पंजाब के तीन मजदूरों का जो कि मणिकर्ण में मजदूरी का काम करते थे और काम बंद होने के चलते पहले तो वे करीब एक सप्ताह तक अपने कमरे ही बंद रहे। जब पैसे, राशन सब खत्म हो गया तो मणिकर्ण से पैदल ही घर की तरफ चल दिए। क्योंकि हिमाचल में सार्वजनिक परिवहन बंद जिसके चलते ये मजदूर मणिकर्ण से कभी पैदल तो कभी किसी वाहन में लिफ्ट लेकर जैसे-तैसे स्वारघाट पहुंचे। स्वारघाट में गरामौड़ा के पास उन्हें बॉर्डर क्रॉस करना था लेकिन कोई भी ट्रक वाला या अन्य वाहन चालक उन्हें नहीं चढ़ा रहा था। करीब तीन चार घंटे तक वो वाहनों को हाथ मारते रहे।

जैसे ही भाजपा के पूर्व विधायक रणधीर शर्मा द्वारा स्वारघाट में खोले गए सेवा केंद्र के प्रभारी कृष्ण लाल चंदेल, समाजसेवी भूपेंद्र सिंह ठाकुर, रंगी राम ठाकुर, तिलक राज ठाकुर की नजर इन मजदूरों पर पड़ी तो उन्होंने इन मजदूरों की पूरी सहायता की और खाना खिलाने के साथ ही कुछ पैसे देकर इन्हें एक निजी वाहन के माध्यम से आनंदपुर तक पहुंचाया जहां से ये मजदूर बस के माध्यम से अपने घर पहुंच चुके हैं। इन तीनों मजदूरों ने सभी समाजसेवियों और रणधीर शर्मा का धन्यवाद किया है जो मुश्किल की घड़ी में उनका साथ दिया तथा उन्हें अपने घर तक पहुंचाने में सहायता की।

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