ढाई महीने पहले कोरोना से हुई मौत, आज तक नही हुआ अंतिम संस्कार, आखिर कौन जिमेवार

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UP News: कोरोना से संक्रमित लाशों का अंतिम संस्कार नगर निगम या अस्पताल प्रसाशन करवा रहा है। कोरोना का प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शवों को जलाया और दफ्नाया जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में दिमाग को हिलाकर रख देने वाली घटना सामने आई है। जहां कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत ढाई महीने पहले हो चुकी थी लेकिन उसका अंतिम संस्कार नहीं किया है।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते मौत के ढाई महीने बाद एक कोरोना संक्रमित मजदूर का शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया। इस घटना से प्रशासन महकमे में हलचल मच गई है। हैरानी की बात यह है कि मजदूर की मौत के ढाई महीने बाद तक शव जीएस मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखा रहा लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने शव ना दफ्नाया और ना ही जलाया।

अंत में मामला सुर्खियों में आया तो ढाई महीने बाद मजदूर के शव को परिजनों को सौंप दिया।

मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया है कि जब कोरोना से उनके पति की मेरठ मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी तो वह शव लेने के लिए गई थी लेकिन तब अस्पताल के कर्मचारियों ने उनसे 15 हजार रुपये की मांग कर दी थी। उनके पास रुपए नहीं थे। ऐसे में वे अपने गांव रुपए लेने चली गई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन से फोन आया कि अगर आपके पास रुपए नहीं है तो हम बॉडी का अंतिम संस्कार कर देंगे।

अब हापुड़ स्वास्थ्य विभाग ने मृतक नरेश की पत्नी गुड़िया से संपर्क किया और बताया कि आपके पति की बॉडी मोर्चरी में रखी हुई है। इतना सुनते ही पत्नी के होश उड़ गए। अब ढाई महीने बाद नीर फाउंडेशन की मदद से शव का अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना से मौत के बाद शव को अस्पताल में छोड़कर परिजन बिहार चले गए थे।

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