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मकर संक्रांति विशेष: खिचड़ी दान से जुड़ी प्राचीन परंपरा और उसका गहरा महत्व

Religion News: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। यह हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देवता उत्तरायण होते हैं। पूरे देश में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की विशेष परंपरा है।

मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी दान करने का धार्मिक और सामाजिक महत्व है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए जानते हैं इस दान के पीछे का विशेष महत्व और उसके लाभ।

खिचड़ी दान का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओंके अनुसार खिचड़ी दान बहुत पुण्यदायी माना जाता है। यह दान सूर्य देवता को समर्पित है। खिचड़ी में चावल, दाल, घी और तिल जैसे तत्व मौजूद होते हैं। ये सभी सूर्य देव से जुड़े हुए माने जाते हैं।

इस दान को करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है। यह परंपरा न केवल भोजन का दान है बल्कि एक आध्यात्मिक क्रिया भी है। इससे व्यक्ति के पापों का नाश होता है और नए साल की शुभ शुरुआत होती है।

सामाजिक महत्व और परंपरा

मकर संक्रांतिपर खिचड़ी दान करने की परंपरा समाज में सेवा भाव को बढ़ावा देती है। इस दिन लोग साधु-संतों और जरूरतमंदों को खिचड़ी खिलाते हैं। यह दान समाज के कमजोर वर्गों तक पोषण पहुंचाने का काम करता है।

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यह परंपरा सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देती है। सभी वर्गों के लोग इस दान में भाग लेते हैं। इससे समाज में समरसता और सहयोग की भावना मजबूत होती है। यह त्योहार साझा उल्लास और देने की संस्कृति को प्रोत्साहित करता है।

खिचड़ी के पोषण तत्व

खिचड़ीएक संतुलित और पौष्टिक भोजन है। इसमें चावल से कार्बोहाइड्रेट मिलता है। दाल से प्रोटीन प्राप्त होता है। घी से स्वस्थ वसा और तिल से कैल्शियम व अन्य खनिज प्राप्त होते हैं। यह सर्दियों में शरीर को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करता है।

यह भोजन सरल और सुपाच्य होता है। इसे सभी आयु वर्ग के लोग आसानी से पचा सकते हैं। इसकी पौष्टिकता इसे दान के लिए एक आदर्श भोजन बनाती है। यह न केवल भूख मिटाता है बल्कि स्वास्थ्य भी प्रदान करता है।

तिल और गुड़ का विशेष महत्व

मकर संक्रांतिपर तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है। तिल को शरीर के लिए गर्म माना जाता है। गुड़ आयरन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इन दोनों को खिचड़ी के साथ दान करने से इसका महत्व और बढ़ जाता है।

तिल और गुड़ से बने पकवान भी इस दिन बनाए और बांटे जाते हैं। मान्यता है कि तिल दान करने से पाप नष्ट होते हैं। गुड़ दान करने से मिठास और सकारात्मकता जीवन में आती है। यह परंपरा शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ प्रदान करती है।

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पितृ दोष से मुक्ति

धार्मिक शास्त्रोंके अनुसार खिचड़ी दान करने से पितृ देवता प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आती है। वंश परंपरा में खुशहाली बनी रहती है।

यह दान पारिवारिक कलह को दूर करने में सहायक माना जाता है। इससे घर के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भी यह दान कारगर माना जाता है। यह परिवार की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

दान करने का सरल तरीका

खिचड़ीदान करने की प्रक्रिया बहुत सरल है। इसे घर में पवित्र भाव से बनाया जा सकता है। तैयार खिचड़ी को सादगी के साथ जरूरतमंदों को वितरित किया जाता है। कई लोग मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों पर इसका दान करते हैं।

दान करते समय श्रद्धा और सच्ची भावना सबसे महत्वपूर्ण है। इसे दिखावे के बिना सहज रूप से करना चाहिए। दान लेने वाले का सम्मान करना भी आवश्यक है। इससे दान का पूर्ण पुण्य और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

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