Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में सरकारी नौकरी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ गोहर उपमंडल के एक युवक ने कथित तौर पर फर्जी गरीबी प्रमाण पत्र (IRDP) बनवा लिया। उसने इसी जाली दस्तावेज के दम पर जलशक्ति विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) की कुर्सी हासिल कर ली। इस खुलासे के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। विजिलेंस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
माता-पिता अफसर, बेटा ‘गरीब’
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपी की पारिवारिक पृष्ठभूमि है। शिकायत के मुताबिक, आरोपी के माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में रहे हैं। माँ शिक्षा विभाग में तैनात थीं, जबकि पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। ऐसे में परिवार का गरीबी रेखा से नीचे (IRDP) आना नामुमकिन है। शिकायतकर्ता महेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव और विजिलेंस को सारे सबूत सौंप दिए हैं। आरोपी अभी लाहुल-स्पीति के केलंग में ड्यूटी कर रहा है।
पहले भी विभाग में कर चुका है काम
जांच में पता चला है कि आरोपी युवक नया नहीं है। वह साल 1992 से 2000 तक जलशक्ति विभाग में ही सर्वेयर रह चुका है। उसने सुंदरनगर और करसोग मंडल में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बावजूद, पिछले साल उसने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी नौकरी पा ली। उसने खुद को गरीब बताकर आरक्षित कोटे का लाभ उठाया। यह सीधे तौर पर चयन प्रक्रिया और सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
विजिलेंस ने कसी नकेल
शिकायत मिलते ही विजिलेंस टीम एक्शन में आ गई है। अब आरोपी के आय प्रमाण पत्र और पुराने सेवा रिकॉर्ड की बारीकी से जांच हो रही है। अधिकारी यह देख रहे हैं कि अमीर परिवार का बेटा IRDP सूची में कैसे शामिल हुआ। अगर आरोप सही साबित हुए, तो न केवल उसकी सरकारी नौकरी जाएगी, बल्कि उसे जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। विभाग जल्द ही इस पर कड़ा फैसला लेगा।
