Himachal Pradesh News: सरकार ने मनरेगा (MNREGA) योजनाओं में वित्तीय अनुशासन लाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में संचालित सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) के सभी खाते बंद कर दिए गए हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब केवल विलंबित मुआवजे के भुगतान और उसकी वसूली से जुड़े खाते ही चालू रहेंगे। विभाग ने मजदूरी, सामग्री मद और वसूली की राशि को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। अब अधिकारियों को वसूली की गई रकम राज्य स्तर पर निर्धारित बैंक खातों में ही जमा करनी होगी।
मनरेगा के पुराने आदेश रद्द, नई व्यवस्था लागू
ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के तहत पूर्व में जारी सभी आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, संबंधित विभागों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य योजना में पारदर्शिता लाना है। अब मजदूरी और सामग्री मद से जुड़ी किसी भी तरह की वसूली को सीधे राज्य मुख्यालय द्वारा तय किए गए खातों में भेजना अनिवार्य होगा। विभाग ने जोर देकर कहा है कि इन नियमों का पालन समय पर सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों को रखना होगा पूरा रिकॉर्ड
आदेशों के अनुसार, सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को अपने कार्यालय में एक विशेष रजिस्टर बनाना होगा। इस रजिस्टर में मनरेगा मजदूरी, सामग्री और विलंबित मुआवजे की वसूली का पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा। जिला विकास कार्यालयों को निर्देश मिले हैं कि वे हर महीने की 5 तारीख तक जमा राशि का विवरण संकलित करें। इसकी हार्ड कॉपी निदेशालय को भेजनी होगी। इससे खातों का सही मिलान और लेखा परीक्षण (ऑडिट) आसानी से हो सकेगा।
इस बैंक खाते में जमा होगी राशि
विभाग ने मजदूरी वसूली जमा करने के लिए एचडीएफसी बैंक का एक विशेष खाता निर्धारित किया है। अधिकारियों को वसूली की राशि खाता संख्या 50100694206152 में जमा करानी होगी। यह खाता ‘वाइस चेयरमैन, हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास रोजगार गारंटी सोसायटी वेज रिकवरी’ के नाम से है। मनरेगा में वित्तीय गड़बड़ी रोकने के लिए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। इसकी सूचना सभी जिला विकास अधिकारियों को भी दे दी गई है।
