Himachal News: कांगड़ा जिले में प्रशासन ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। यहां एक पंचायत उपप्रधान को सरकारी जमीन पर कब्जा करना महंगा पड़ गया। उपायुक्त (डीसी) ने कड़ा फैसला लेते हुए उपप्रधान को उनके पद से हटा दिया है। यह मामला लोअर लंबागांव पंचायत का है। ताजा हिमाचल न्यूज के अनुसार, उपप्रधान हरि दास पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने के आरोप सही पाए गए थे। प्रशासन के इस फैसले से अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है।
सरकारी जमीन पर लहलहा रही थी फसल
प्रशासन को शिकायत मिली थी कि उपप्रधान हरि दास ने तहसील जयसिंहपुर के तहत सरकारी जमीन दबा ली है। जांच में यह शिकायत बिल्कुल सही पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उपप्रधान ने करीब दो मीटर सरकारी क्षेत्र पर कब्जा जमा रखा था। हद तो तब हो गई जब उन्होंने इस सरकारी जमीन पर फसल भी बीज दी। एक जनप्रतिनिधि द्वारा सरकारी संपत्ति का ऐसा दुरुपयोग नियमों के खिलाफ था। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
नोटिस को किया था नजरअंदाज
जांच में सामने आया कि यह अतिक्रमण साल 2024 में किया गया था। प्रशासन ने पहले भी उपप्रधान को नोटिस जारी किया था। उन्हें कब्जा हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया। तहसीलदार जयसिंहपुर ने अपनी जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपी थी। इसमें साफ लिखा था कि पंचायत प्रतिनिधि ने पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन किया है। कारण बताओ नोटिस का जवाब भी संतोषजनक नहीं मिला।
डीसी ने तत्काल प्रभाव से हटाया
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 (1)(क) का प्रयोग किया। उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अगर कोई रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो वह पद पर रहने के लायक नहीं है। यदि कोई पंचायत प्रतिनिधि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करता है, तो उसे पद से हटा दिया जाएगा। इसी नियम के तहत हरि दास को तत्काल प्रभाव से उपप्रधान पद से बर्खास्त कर दिया गया है।

