Himachal News: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासन को हिला दिया है। इस हादसे के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की नींद टूटी है। अधिकारियों ने जिले भर में स्कूल बसों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा है। जांच के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाली 60 स्कूल बसों के चालान काटे गए हैं। प्रशासन की इस सख्ती से स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
हादसे के बाद जागी पुलिस और प्रशासन
ऊना में हाल ही में स्कूल बस की चपेट में आने से एक छोटी बच्ची की जान चली गई थी। इस घटना के बाद अभिभावकों में भारी रोष देखा गया। दबाव बढ़ते ही पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों ने सड़कों पर नाकाबंदी की। उन्होंने बच्चों को ले जा रही बसों के दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की। जांच में पाया गया कि कई बसें बिना फिटनेस और जरूरी उपकरणों के चल रही थीं।
बसों में मिलीं सुरक्षा नियमों की भारी कमियां
प्रशासनिक टीम ने जांच के दौरान पाया कि कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र गायब थे। कुछ बसों के ड्राइवर बिना वर्दी और वैध लाइसेंस के वाहन चला रहे थे। बच्चों की सुरक्षा के लिए तय किए गए ‘माननीय सुप्रीम कोर्ट’ के दिशा-निर्देशों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। पुलिस ने साफ किया है कि बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले किसी भी वाहन को बख्शा नहीं जाएगा।
स्कूल संचालकों को प्रशासन की सख्त चेतावनी
उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने सभी निजी स्कूलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल बसों की फिटनेस रिपोर्ट हर हाल में पूरी होनी चाहिए। बस ड्राइवरों का वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को बस में बिठाते समय सुरक्षा मानकों की स्वयं जांच करें। आने वाले दिनों में यह चेकिंग अभियान और तेज किया जाएगा।


