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हिमाचल में पंचायत चुनाव से पहले बड़ा एक्शन! 21-22 जनवरी को होगा ये काम, मिलेगी 10 लाख की इनामी राशि

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का बिगुल बजने से पहले एक बड़ी हलचल शुरू हो गई है। पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले राज्य सरकार ‘एंटी-चिट्टा’ अभियान को लेकर एक विशेष ग्राम सभा आयोजित करने जा रही है। प्रदेश भर की सभी पंचायतों में यह विशेष बैठक 21 और 22 जनवरी को आयोजित की जाएगी। इस बैठक का मुख्य मकसद नशे के सौदागरों पर नकेल कसना और समाज को नशामुक्त बनाना है।

31 जनवरी के बाद बदल जाएगी व्यवस्था

प्रदेश में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इसके बाद पंचायतों की बागडोर पंचायत सचिवों के हाथों में आ जाएगी। कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों में कोई भी नया विकासात्मक कार्य नहीं हो पाएगा। इसलिए, यह मौजूदा प्रधानों और प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में होने वाली आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण ग्राम सभा मानी जा रही है।

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‘जिंदगी को हां, चिट्टे को ना’ की शपथ

मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि जिले की 555 पंचायतों में इस सभा के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। बैठकें सुबह 11 बजे शुरू होंगी। इसके लिए दो दिनों का रोस्टर तैयार किया गया है। इस दौरान पंचायत प्रधान ग्रामीणों को ‘जिंदगी को हां और चिट्टे को ना’ की शपथ दिलाएंगे। प्रशासन ने महिला मंडलों, आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

तस्करों की सूचना देने पर मिलेंगे 10 लाख

ग्राम सभा में लोगों को सरकार की इनामी योजना के बारे में भी बताया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, नशा तस्करों की सूचना देने वालों को नकद ईनाम दिया जाएगा और उनका नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। इनामी राशि इस प्रकार है:

  • 2 ग्राम चिट्टा: 10,000 रुपये
  • 5 ग्राम चिट्टा: 25,000 रुपये
  • 25 ग्राम चिट्टा: 50,000 रुपये
  • 1 किलो चिट्टा: 5 लाख रुपये
  • 1 किलो से अधिक: 10 लाख रुपये
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इन मुद्दों पर होगी खास चर्चा

इस विशेष ग्राम सभा में सिर्फ शपथ ही नहीं ली जाएगी, बल्कि ठोस रणनीति भी बनेगी। बैठक में नशा पीड़ितों की पहचान करने और उन्हें नशा मुक्ति केंद्र (पुनर्वास) भेजने पर विचार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भटके हुए युवाओं को दोबारा समाज की मुख्यधारा में लाना है। अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि वे इस अभियान को केवल रस्म अदायगी न बनाएं बल्कि इसे एक जन आंदोलन का रूप दें।

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