Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करों के साथ मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों की अब खैर नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐसे दागी खाकी वर्दीधारियों के खिलाफ कड़े एक्शन का आदेश दिया है। अब चिट्टा तस्करी में शामिल पुलिस वालों की संपत्ति और बैंक खातों की भी बारीकी से जांच होगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि वर्दी की आड़ में काला कारोबार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
संपत्ति और बैंक खातों का होगा हिसाब
सरकार ने फैसला लिया है कि आरोपी पुलिसकर्मियों के वित्तीय लेन-देन को खंगाला जाएगा। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि अवैध धंधे से इन्होंने कितनी काली कमाई जमा की है। इसके लिए उनके बैंक खातों, निवेश और आय के अन्य स्रोतों की गहरी छानबीन की जाएगी। मकसद यह साफ करना है कि नशा तस्करी के जरिए इन्होंने कितनी संपत्ति अर्जित की है।
कॉल डिटेल से खुलेगा राज
मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसियों को पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकालने के निर्देश भी दिए हैं। इससे यह पता चलेगा कि ये कर्मचारी किन तस्करों और संदिग्ध लोगों के लगातार संपर्क में थे। सीडीआर रिपोर्ट से नशा तस्करी के नेटवर्क में उनकी भूमिका और गहराई का सही अंदाजा लग सकेगा। जांच का दायरा केवल पुलिस कर्मियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके सहयोगियों तक भी बढ़ाया जाएगा।
बड़े अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
सरकार यह भी पता लगाएगी कि चिट्टा तस्करी का यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा था। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि अगर किसी वरिष्ठ अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उस पर भी सख्त कार्रवाई होगी। सरकार नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। विभाग की साख खराब करने वालों को किसी भी हाल में माफी नहीं मिलेगी। सरकार का लक्ष्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
