Maharashtra News: बृहन्मुंबई महानगरपालिका के चुनाव परिणाम सामने आ रहे हैं। पहले चरण की मतगणना में दो विजेताओं की घोषणा हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी की तेजस्वी घोसलकर ने वार्ड संख्या दो से जीत दर्ज की है। एआईएमआईएम की खैरुन्निसा अकबर हुसैन ने वार्ड 145 पर कब्जा जमाया है।
यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। बीएमसी देश की सबसे धनी नगर निकायों में से एक है। इसके चुनाव पर राज्य की राजनीतिक दिशा तय होती है। कुल 29 सीटों के लिए मतगणना का कार्य जारी है।
तेजस्वी घोसलकर का राजनीतिक सफर
तेजस्वीघोसलकर मुंबई के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने 2017 का नगर निगम चुनाव शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) से जीता था। वह पूर्व शिवसेना नेता अभिषेक घोसलकर की पत्नी हैं। अभिषेक घोसलकर की 2024 में फेसबुक लाइव के दौरान हत्या कर दी गई थी।
उनके ससुर विनोद घोसलकर भी वरिष्ठ शिवसेना नेता और पूर्व विधायक रह चुके हैं। यह परिवार मुंबई की स्थानीय राजनीति में गहरी पैठ रखता है। तेजस्वी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत शिवसेना से ही की थी।
चुनाव से पहले बीजेपी में हुआ शामिल
तेजस्वीघोसलकर ने 2025 में एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया। उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को छोड़ दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
बीएमसी चुनाव से ठीक पहले उनके इस फैसले ने सभी की नजरें अपनी ओर खींचीं। उद्धव ठाकरे ने अतीत में उनके मुद्दों पर बात की थी और उनका समर्थन किया था। पार्टी बदलने के बाद भी उन्हें तुरंत बीजेपी से चुनावी टिकट मिल गया।
चुनावी महत्व और अन्य विजेता
वार्ड 145 सेएआईएमआईएम की खैरुन्निसा अकबर हुसैन ने जीत हासिल की है। उन्होंने जीत के बाद विकास कार्यों पर ध्यान देने का संकल्प लिया है। भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक, स्थानीय निकाय चुनाव लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार हैं।
बीएमसी चुनावों को महाराष्ट्र में राजनीतिक पार्टियों के लिए अहम माना जाता है। यह चुनाव प्रदेश की राजनीतिक हवा का पता लगाने में मददगार होते हैं। महाराष्ट्र सरकार के अधीन यह निकाय मुंबई के बुनियादी ढांचे की देखभाल करता है।
मतगणना के शुरुआती घंटों में ही तेजस्वी घोसलकर की जीत सुनिश्चित हो गई थी। यह जीत उनके लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। यह जीत एक त्रासदी के बाद उनकी वापसी का प्रतीक भी मानी जा रही है।
शिवसेना से बीजेपी में हुए इस परिवर्तन को राजनीतिक विश्लेषक एक सटीक चाल मान रहे हैं। यह मुंबई की स्थानीय राजनीति में दलों की रणनीति को दर्शाता है। बाकी सीटों के नतीजे आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।
