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महाराष्ट्र चुनाव: मुंबई ने नकारा परिवारवाद, नवी मुंबई ने दिया भरपूर समर्थन!

Maharashtra News: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। परिवारवाद को लेकर मुंबई और नवी मुंबई के मतदाताओं ने अलग-अलग राय दी है। मुंबई में मतदाताओं ने बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को साफ नकार दिया। वहीं नवी मुंबई में उन्हीं परिवार के सदस्य जनता की पहली पसंद बनकर उभरे। यह चुनाव परिवारवाद पर एक सामाजिक मतदान साबित हुआ।

मुंबई के नतीजे बताते हैं कि मतदाताओं ने इस बार वंश के नाम पर वोट नहीं दिया। लंबे समय से चली आ रही परिपाटी इस बार टूटी दिखाई दी। जनता ने स्पष्ट संदेश दिया कि उनके लिए नाम नहीं, बल्कि काम महत्वपूर्ण है। कई बड़े नेताओं के परिवार के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए।

मुंबई में हारे बड़े नेताओं के रिश्तेदार

शिवसेना(शिंदे गुट) के नेता राहुल शेवाले की भाभी वैशाली शेवाले धारावी से चुनाव हार गईं। उन्हें कांग्रेस की आशा काले ने हराया। शिवसेना सांसद रविंद्र वायकर की बेटी दीप्ति वायकर भी जीत नहीं पाईं। यूबीटी की लोना रावत ने उन्हें शिकस्त दी। शिवसेना विधायक मंगेश कुंडालकर के बेटे जय कुंडालकर भी हार गए।

एनसीपी के नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक भी अपना वार्ड नहीं बचा पाए। उन्हें कांग्रेस के अशरफ अजामी ने पराजित किया। अंडरवर्ल्ड से राजनीति में आए अरुण गवली की दोनों बेटियां योगिता और गीता गवली भी चुनाव नहीं जीत पाईं। कांग्रेस विधायक असलम शेख के दामाद आहात खान की भी हार हुई।

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नवी मुंबई में परिवारों का जलवा

नवीमुंबई में पूरी तस्वीर उलट दिखाई दी। यहां मतदाताओं ने नेताओं के रिश्तेदारों को भरपूर समर्थन दिया। ऐरोली से शिवसेना नेता विजय चौगुले स्वयं चुने गए। साथ ही उनकी बेटी चांदनी चौगुले, दामाद आकाश मधवी और बेटा ममित चौगुले ने भी जीत दर्ज की। इस तरह एक ही परिवार के चार सदस्य विजयी हुए।

ऐरोली सेक्टर-4 से हेमांगी सोनवाने और उनकी बेटी ऐश्वर्या सोनवाने दोनों ने जीत हासिल की। वाशी में शिवसेना की प्रणाली लाड और उनकी बेटी सोनवी लाड ने भी चुनाव जीता। तलवाली-राबले से मंदाकिनी महात्रे और उनके बेटे अनिकेत महात्रे की जोड़ी सफल रही।

भाजपा के परिवारों ने भी बनाई जगह

भाजपाके कई परिवारों ने भी नवी मुंबई में अपनी पकड़ मजबूत की। सानपाड़ा से दशरथ भगत, उनके भतीजे निशांत भगत और बहू प्रीति भगत तीनों विजयी रहे। तुर्भे से सुरेश कुलकर्णी और उनकी बहू अबोली कुलकर्णी ने जीत हासिल की। नेरुल से पूर्व मेयर जयवंत सुतार और बहू माधुरी सुतार भी चुनाव जीत गए।

तुर्भे से काशीनाथ पाटिल और बेटी प्रणाली पाटिल ने सफलता पाई। बेलापुर से पूनम पाटिल और भतीजे अमित पाटिल ने भी जीत दर्ज की। कैबिनेट मंत्री गणेश नाइक के बेटे सागर नाइक, बहू वैष्णवी नाइक, अदिति नाइक और रेखा महात्रे सभी चुने गए। नवी मुंबई से पति-पत्नी की चार जोड़ियों ने भी जीत हासिल की।

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दो शहरों की अलग राजनीतिक संस्कृति

येनतीजे दर्शाते हैं कि मुंबई और नवी मुंबई की राजनीतिक संस्कृति में स्पष्ट अंतर है। मुंबई के मतदाता अधिक परिपक्व और मुद्दा आधारित मतदान करते दिखे। उन्होंने केवल नाम के आधार पर वोट देने से इनकार कर दिया। नवी मुंबई के मतदाताओं ने परिचित चेहरों को प्राथमिकता दी।

विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई में नागरिक मुद्दे अधिक प्रभावी रहे। स्थानीय विकास और सेवाओं का मतदान पर सीधा असर देखा गया। नवी मुंबई में मतदाताओं ने स्थापित परिवारों को भरोसा जताया। उन्हें लगा कि ये परिवार उनकी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

राज्य की राजनीति पर प्रभाव

इन नतीजोंसे स्पष्ट है कि परिवारवाद को लेकर जनता की राय एक समान नहीं है। हर क्षेत्र की अपनी सामाजिक और राजनीतिक गतिशीलता है। मतदाता स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में यह विविधता साफ देखी जा सकती है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों शहरों का यह मतदान पैटर्न कितना टिकाऊ साबित होता है। क्या मुंबई में परिवारवाद विरोधी रुझान बना रहेगा? क्या नवी मुंबई में परिवारों का दबदबा कायम रहेगा? ये सवाल भविष्य के चुनावों में स्वतः ही स्पष्ट हो जाएंगे।

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