Maharashtra News: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली है। पार्टी ने 25 साल से शिवसेना के गढ़ रहे मुंबई पर कब्जा कर लिया। यह बीजेपी की ऐतिहासिक जीत मानी जा रही है। कांग्रेस का प्रदर्शन भी चुनाव में अच्छा रहा। पार्टी ने अकेले चुनाव लड़कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
भाजपा ने कुल 1441 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। एकनाथ शिंदे की शिवसेना 408 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस 317 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर पहुंची। यह चुनाव कम से कम चार प्रमुख पार्टियों के लिए विचार का विषय बन गया है।
कांग्रेस को कितनी सीटों पर मिली जीत
कांग्रेस नेअकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था। पार्टी ने कुल 2869 सीटों में से केवल 528 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसके बावजूद पार्टी ने 29 नगर निगमों में 317 सीटें जीतने में सफलता पाई। मुंबई में कांग्रेस को कोई खास सफलता नहीं मिली। लेकिन राज्य के अन्य नगर निगमों में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा।
पार्टी का प्रदर्शन ठाकरे भाइयों के गठबंधन या पवार परिवार के गुटों से बेहतर रहा। यह परिणाम राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए सकारात्मक संदेश है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अच्छा मुकाबला किया।
भाजपा की शानदार जीत और रणनीति
भाजपाने वर्ष 1999 के बाद पहली बार अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। पार्टी ने मुंबई, नवी मुंबई, नासिक और पुणे में दबदबा बनाया। नागपुर, पनवेल और कल्याण डोंबिवली में भी पार्टी की मजबूत उपस्थिति रही। पार्टी ने कुल 528 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
गठबंधन बदलने और पुरानी परंपराओं के कारण यह निर्णय लिया गया। पार्टी की यह रणनीति सफल साबित हुई। भाजपा ने पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और छत्रपति संभाजीनगर जैसे महत्वपूर्ण नगर निगमों में अच्छा प्रदर्शन किया। राज्य भर में पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा।
शिवसेना और एनसीपी गुटों को झटका
शिवसेनाके दोनों गुटों और राज ठाकरे की एमएनएस को चुनाव में निराशा हाथ लगी। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विरासत का फायदा उठाने की कोशिश की। लेकिन वे मतदाताओं का समर्थन हासिल करने में सफल नहीं हो सके। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के दोनों विरोधी गुटों को भी कम सफलता मिली।
दोनों गुटों ने अस्थायी एकजुटता दिखाई थी। लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे गढ़ों में वे समर्थन जुटाने में विफल रहे। यह परिणाम इन दलों के लिए सोचने का विषय बन गया है। राज्य की राजनीति में नए समीकरण उभर रहे हैं। पारंपरिक गठबंधनों की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं।
महा विकास अघाड़ी के टूटने का प्रभाव
महाविकास अघाड़ी के टूटने का सीधा प्रभाव चुनाव परिणामों में देखा गया। उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया था। शरद पवार के गुट ने अजीत पवार के गुट के साथ हाथ मिलाया था। इसके बाद कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह रणनीति पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुई।
वर्ष 2019 में कांग्रेस अपने चरम पर थी। उस समय भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूट गया था। उद्धव ठाकरे की अविभाजित शिवसेना ने कांग्रेस और अविभाजित एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। वर्तमान चुनाव परिणाम उस गठबंधन की स्थिति को दर्शाते हैं। राज्य की राजनीति में नई गतिशीलता देखी जा रही है।
