अंतरिक्ष में फैले कबाड़ (कचरे) को खत्म करने के लिए शनिवार को जापान ने एक चुंबकीय उपग्रह (मैगनेटिक सैटेलाइट) को लॉन्च किया। इससे अंतरिक्ष में एकत्रित हुए कचने की गणना की जाएगी। ताकि कचरे को हटाया जा सके। बताया जा रहा है कि दुनिया में पहली बार ऐसे हुआ है जब उपग्रह निर्माण में चुंबक का इस्तेमाल किया गया।

इस उपग्रह का नाम ईएलएसए-डी नाम है। इसे जापानी फर्म स्ट्रॉस्केल द्वारा बनाया गया है। इस उपग्रह को शनिवार सुबह 6:07 मिनट पर कजाकिस्तान से लॉन्च किया गया। इसका लाइव प्रसारण भी किया गया। इस उपग्रह में दो अंतरिक्षयान होंगे, जो ब्राह़मांड में ढेर सारे टेस्ट करेंगे। स्ट्रॉस्केल की स्थापना 2013 में जापानी व्यवसायी नोबू ओकाडा ने किया था। ओकाडा की मानें तो एक अनुमान के मुताबिक अंतरिक्ष में करीब नौ हजार दो सौ टन कबाड़ (कचरा) है। इसमें से अधिकांश टुकड़े अंतरिक्षयान के टूटे हुए हिस्से हैं। 

यह मलबे के रूप में पृथ्वी के ऊपर मंडरा रहे हैं, जो किसी समय बड़े हादसे को संकेत दे रहे हैं। उन्होंने कहा स्ट्रॉस्केल कंपनी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में कचरे को खत्म करना है। उन्होंने बताया कि कंपनी द्वारा निर्मित ईएलएसए-डी उपग्रह को लॉन्च कर दिया गया है। इसका वजन करीब दो सौ किलोग्राम है। यह उपग्रह अंतरिक्ष में फैले कचरों की गणना करेगा। इस उपग्रह की खास बात यह है कि ये अंतरिक्ष में कचरे की मात्रा बताकर उन्हें साफ करने के बाद वहीं पर खुद जलकर नष्ट भी हो जाएगा।

ओकाडा ने जानकरी देते हुए बताया कि हमें अपने इस चुंबकीय उपग्रह की लॉन्चिंग के मौके पर बहुत खुशी हो रही है। अंतरिक्ष में फैले कचरे से निपटने के लिए हमारी टीम ने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। अंतरिक्ष पर एकित्रत मलबा खतरे के संकेत दे रहे हैं। यह कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इसे लेकर समय नहीं उठाया गया तो हमें एक बड़ी मुसीबत का सामना करना होगा।

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