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मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तमिलनाडु में ‘कार्तिकेय दीपम’ जलाने की परंपरा जारी रहेगी

Tamil Nadu News: मद्रास उच्च न्यायालय ने तिरुपन कुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिकेय दीपम जलाने की परंपरा को जारी रखने का आदेश दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार के हस्तक्षेप को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सदियों से चली आ रही इस धार्मिक प्रथा को राजनीतिक कारणों से रोका नहीं जा सकता। इस फैसले को हिंदू समुदाय के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

अदालत ने अपने फैसले में राज्य सरकार की दलील को हास्यास्पद बताया। सरकार ने कानून व्यवस्था के खतरे का हवाला देकर दीप जलाने पर रोक लगाने की कोशिश की थी। न्यायाधीशों ने कहा कि सार्वजनिक शांति का बहाना बनाना उचित नहीं है। धार्मिक आस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप को कोर्ट ने गलत ठहराया।

सदियों पुरानी है यह परंपरा

तिरुपन कुंद्रम पहाड़ीपर दीप जलाने की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी बताई जाती है। यह दीप भगवान मुरुगन के मंदिर से लगभग पंद्रह मीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर प्रशासन के पास ही इस दीप को जलाने का अधिकार है। स्थानीय प्रशासन ने आसपास एक दरगाह होने का हवाला देकर इस पर रोक लगाने की कोशिश की थी।

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उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दीप जलाना किसी भी तरह से सार्वजनिक शांति को प्रभावित नहीं करता। अदालत ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि धर्मशास्त्र के अनुसार दीपक का स्थान गलत है। पिछले आदेश को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर दबाव की कोशिश

इस मामलेमें विपक्षी दलों के सांसदों ने न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोग की धमकी दी थी। अदालत ने इस प्रयास को लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों को डराने की कोशिश अस्वीकार्य है। यह फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अदालत ने आगे कहा कि अगर कानून व्यवस्था की कोई चिंता है तो केंद्रीय बलों की तैनाती की जा सकती है। इससे भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। पर धार्मिक प्रथाओं को रोकना कोई समाधान नहीं है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह धार्मिक आस्था का सम्मान करे।

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धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन

इस फैसलेको हिंदू समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता के पक्ष में एक मजबूत बयान माना जा रहा है। स्थानीय लोग इस फैसले से बहुत खुश हैं। उनका मानना है कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करता है। तिरुपन कुंद्रम दीपम उनकी आस्था का प्रतीक है जो सदियों से जल रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश में धार्मिक प्रथाओं और राजनीतिक हस्तक्षेप का प्रश्न उठाता है। अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि धार्मिक आस्था में राजनीति का हस्तक्षेप अनुचित है। न्यायपालिका संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करेगी।

फिलहाल मद्रास उच्च न्यायालय का यह फैसला अंतिम माना जा रहा है। राज्य सरकार ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। मंदिर प्रशासन अब नियमित रूप से दीप जलाने की प्रक्रिया जारी रखेगा। भक्तगण बिना किसी रुकावट के अपनी धार्मिक प्रथा का पालन कर सकेंगे। यह फैसला भारत की धर्मनिरपेक्ष न्याय प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

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