Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश पुलिस की दो महिला अधिकारी विपरीत कारणों से चर्चा में हैं। सिवनी की सीएसपी पूजा पांडेय पर तीन करोड़ रुपये की हवाला रकम लूटने का आरोप है। इसके विपरीत ग्वालियर की सीएसपी हिना खान ने जातीय तनाव को शांत करने में सूझबूझ दिखाई। दोनों घटनाओं ने पुलिस विभाग को अलग-अलग तरीके से प्रभावित किया है।
पूजा पांडेय को उनके ग्यारह सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के आदेश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। मामले में डकैती और अपहरण जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। यह घटना पुलिस विभाग के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है।
सिवनी में हवाला रकम लूटने का मामला
आठ अक्टूबर कीरात सिवनी के सिला दे ही जंगल में एक बड़ी घटना हुई। पूजा पांडेय और उनकी टीम ने कटनी से जालना जा रही एक गाड़ी को रोका। कार में हवाला के तीन करोड़ रुपये से अधिक की नकदी थी। पुलिस ने इस रकम को जब्त करने के बजाय स्वयं हड़प लिया।
मामला सामने आने पर उच्च स्तर पर जांच शुरू हुई। पुलिस अधीक्षक पूजा पांडेय और टीआई अर्पित भैरम समेत ग्यारह कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों ने ड्राइवर के साथ मारपीट भी की। उन पर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना न देने का भी आरोप है।
ग्वालियर में हिना खान ने तनाव किया कम
ग्वालियर में सीएसपी हिना खान ने एक संवेदनशील स्थिति को संभाला। एक वकील अनिल मिश्रा ने दलित समुदाय के नेता पर विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद दलित संगठनों ने बड़े प्रदर्शन की घोषणा कर दी। शहर में जातीय तनाव का माहौल बन गया।
इसी दौरान अनिल मिश्रा ने अपने घर पर रामायण पाठ का आयोजन करना चाहा। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इसकी अनुमति नहीं दी। मिश्रा ने हिना खान पर सनातन धर्म विरोधी होने का आरोप लगाया। इस पर हिना खान ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाकर जवाब दिया।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
हिनाखान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। कई यूजर्स ने उनकी सूझबूझ और व्यवहार कुशलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका तरीका तनाव कम करने में सहायक साबित हुआ। इसने एक बड़े सामाजिक संघर्ष को रोकने में मदद की।
वहीं पूजा पांडेय के मामले में लोग पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। जनता का कहना है कि ऐसे अधिकारी विभाग की छवि खराब करते हैं। उन्होंने पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला पुलिस सुधारों की जरूरत को रेखांकित करता है।
प्रशासन ने की कड़ी कार्रवाई
सिवनी मामले में पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। डीजीपी के आदेश पर सभी आरोपी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी धाराएं लगाई गईं। इससे स्पष्ट संदेश गया कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्वालियर में प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पंद्रह अक्टूबर को होने वाले आंदोलन पर रोक लगा दी गई। शहर में चार हजार पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। इन कदमों से बड़े पैमाने पर हिंसा होने से रोकने में मदद मिली।
दोनों घटनाएं पुलिस व्यवस्था के दो अलग पहलू दिखाती हैं। एक तरफ जहां कुछ अधिकारी भ्रष्ट आचरण में लिप्त पाए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी संकट की स्थिति में बेहतर नेतृत्व प्रदर्शित करते हैं। ये मामले पुलिस विभाग में सुधार की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

