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लक्जरी गाड़ियां, वो काली रात और नीट छात्रा की मौत; पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पुलिस की पोल

Patna News: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया था। लेकिन अब मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। छात्रा के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। यह मामला अब आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या और दरिंदगी की ओर इशारा कर रहा है। आरोप है कि रसूखदारों को बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

पोस्टमार्टम में सामने आया खौफनाक सच

पटना पुलिस के अधिकारी शुरू में नींद की गोलियों और गूगल सर्च हिस्ट्री का हवाला देकर इसे सुसाइड बता रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने रूह कंपा देने वाली हकीकत सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा की गर्दन पर नाखूनों के निशान मिले हैं। गले की नस में पंक्चर पाया गया है। छाती, जांघ और पीठ पर नीले निशान हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि प्राइवेट पार्ट पर मिली चोटें जबरन शारीरिक संबंध और दरिंदगी का संकेत दे रही हैं।

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हॉस्टल के बाहर लग्जरी गाड़ियों का राज

स्थानीय लोगों के मुताबिक, शाम होते ही हॉस्टल के बाहर महंगी लग्जरी गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती थी। अब सवाल उठ रहा है कि उन गाड़ियों में कौन आता था? उनका हॉस्टल के भीतर क्या काम था? परिजनों का आरोप है कि इन्हीं हाई-प्रोफाइल चेहरों को बचाने के लिए पुलिस ने ‘सुसाइड’ की झूठी कहानी रची। यह सिर्फ एक मौत का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े ‘कवर-अप’ की साजिश लग रही है।

वार्डन ने माता-पिता से क्यों छिपाया सच?

5 जनवरी की रात 9 बजे छात्रा ने अपने माता-पिता से सामान्य बात की थी। अगली सुबह 6 जनवरी को वह संदिग्ध हालत में बेहोश मिली। इस दौरान हॉस्टल वार्डन नीतू ठाकुर ने छात्रा के माता-पिता को तुरंत खबर नहीं दी। उन्होंने एक सहेली के पिता को फोन किया। आखिर परिजनों से सच क्यों छिपाया गया? क्या इस दौरान सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई? यह सवाल अब भी अनसुलझा है।

मां को देखकर रो पड़ी थी बेटी

इलाज के दौरान निजी अस्पतालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। डॉ. सतीश की शुरुआती रिपोर्ट में चोट न होने की बात कही गई थी, जो अब झूठ साबित हो रही है। मृतका के मामा ने बताया कि अस्पताल में उसे कुछ पलों के लिए होश आया था। मां ने जब पूछा कि क्या गलत हुआ है, तो वह कुछ बोल नहीं सकी। बस उसकी आंखों से आंसू बह निकले और वह हमेशा के लिए खामोश हो गई। शक है कि कहीं उसे चुप कराने के लिए कोई गलत इंजेक्शन तो नहीं दिया गया?

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एसआईटी के सामने सुलगते सवाल

आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में बनी एसआईटी (SIT) अब इस मामले की जांच कर रही है। टीम के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं:

  • वारदात के वक्त पहने छात्रा के कपड़े कहां गायब कर दिए गए?
  • मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा में कौन से राज छिपे हैं?
  • हॉस्टल के रजिस्टर में अतिथियों के नाम दर्ज क्यों नहीं हैं?
  • गलियारे वाले गेट पर सीसीटीवी क्यों नहीं लगा था?
    हॉस्टल मालिक मनीष रंजन और अन्य आरोपी जांच के घेरे में हैं। अब एम्स के विशेषज्ञों और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। एक मां आज भी अपनी बेटी के इंसाफ के लिए लड़ रही है।

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