फेसबुक पर सचे प्यार की तलाश, गधों को घोड़ों की आस – तृप्ता भाटिया

फेसबुक एकाउंट बनाते ही इनबॉक्स में दाना डालने की आदत है तो सावधान रहें । लड़के अक्सर लड़कियों वाली प्रोफाइल को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं।
और एक्सेप्ट होते ही…
हाय, हैल्लो, कैन यू गीभ मी योर ओन नम्बर, आई रियली लव यू जैसे रायता फैलाना शुरू कर देते हैं।

कभी-कभी पूजा प्रणीत, आयुषी आयुष, पापा की परी, अचानक से पापा का पारा निकल आते हैं। इनके निकलने से पहले अपनी पसंद से लेकर, फैमिली मेंबर्स तक की भी जानकारी एक-दूसरे तक साझा हो गई होती है बस रिंग सेरेमनी के ख्यालों में डूबे यह आशिक़ लोग छन से जो टूटे कोई सपना सुनना शुरू कर देते हैं।

पता चलते ही ” कई दिन सदमें में रहने के बाद” फिर गंगा जल स्वयं और अपने आईडी पर छींट कर पुनः अपने ऑनलाइन दुल्हनिया की खोज में निकल पड़ते हैं ।

इनको बहुत कठिन परिश्रम से गुजरना पड़ता है तब जाकर कहीं एक-दो असली वाली महिला की आईडी मिलती है जिनके यह रिचार्ज करवा रहे होते और कई बार खाते में पैसे ट्रांसफर भी करवा चुके होते हैं।

बड़ी जटिल प्रक्रिया से गुजरने के बाद एक-दो महीनों के वार्ता के पश्चात लड़के द्वारा प्रेम के प्रस्ताव को “आई हैव अलरेडी ब्यॉफ्रेंड” कह के ठुकरा दिया जाता है जो कि दूसरा भी लड़का ही है।

फिर पांच-छह दिनों तक बेवफाई वाली पोस्ट, स्टेटस की औपचारिकता निभाते हुए पुनः खोज शुरू हो जाती है अब यह खोज वैसी ही जैसे बार बार किसी सब्जेक्ट में कंपार्टमेंट का आना साला ट्यूशन भी ले रहे पर पले कुछ नही पड़ रहा।

ऐसे निरंतर संघर्षरत फेसबुकिया आशिक़ों को उनकी माशूका मिले मेरी शुभकामनाएं अगर यहाँ नहीं मिल रही तो एक राउंड टिंडर का मार के देखो लो वो भी ऐसी जगह है जिस पर बैन लगना चाहिए।

ये मेरे देश के आशिको तुम्हें दीवार में न चुनवा के किसी काम मे अगर लाया जा सकता है तो वो है खड्डा भरना इन वेवफाओं के चक्कर में मत पड़ो यह परियां हैं या परे यह सबकी हो सोच से परे है।

साभार: तृप्ता भाटिया की वाल से

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